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विद्यार्थियों के आगे झुका पीयू: 140 दिन के संघर्ष के बाद शपथपत्र वापस, छात्र बोले-केंद्र को झुकाना अभी बाकी

Wed, 05 Nov 2025 02:53 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

पीयू प्रशासन ने 18 जून को प्रदर्शन-नियंत्रण शपथपत्र जारी किया था, जिसमें 11 शर्तें रखी गई थीं जैसे कि प्रदर्शन से पहले प्रशासन से अनुमति लेना, केवल तय स्थान पर प्रदर्शन करना, बाहरी व्यक्तियों को शामिल न करना और संपत्ति को नुकसान न पहुंचाना आदि। अब इसे वापस ले लिया गया है।
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पंजाब यूनिवर्सिटी में अभिषेक डागर की भूख हड़ताल खत्म करवाते हुए डीएसडब्ल्यू - फोटो : संवाद
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विस्तार
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चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में छात्रों का 140 दिन लंबा संघर्ष आखिरकार रंग लाया। प्रदर्शन-विरोधी शपथपत्र को लेकर चल रहा संघर्ष मंगलवार को पीयू प्रशासन के इसे वापस लेने के एलान के बाद समाप्त हुआ। इसके साथ यूनिवर्सिटी कैंपस में वीसी कार्यालय के सामने विद्यार्थियों ने जीत का जश्न मनाया, नारे लगे, ढोल बजे और हवा में जयकारों की गूंज फैल गई।
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यह संघर्ष छात्रों के लिए सिर्फ एक दस्तावेज का विरोध नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई थी। भूख हड़ताल पर बैठे पीयूसीएससी महासचिव अभिषेक डागर ने सातवें दिन डीएसडब्ल्यू अमित चौहान के हाथों से जूस पीकर अपना मरणव्रत तोड़ा, साथ ही एंटी एफिडेविट फ्रंट ने भी धरना समाप्त करने की घोषणा की। विद्यार्थियों ने कहा कि प्रशासन तो झुक गया, अब केंद्र सरकार को झुकाना बाकी है। अभी सीनेट चुनाव बहाली तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

मंगलवार दोपहर विद्यार्थियों के पूरे कैंपस को ठप करने के बाद एडमिन ब्लॉक के दरवाजे तोड़कर छात्रों को अंदर बुलाया गया। दोपहर 3:30 बजे शुरू हुई बैठक रात 7 बजे तक चली। लंबी बातचीत के बाद आखिरकार पीयू प्रशासन ने शपथपत्र को वापस लेने का फैसला किया।

18 जून से जारी था विरोध, छात्रों ने बनाए रंगोली और स्टिकर

पीयू प्रशासन ने 18 जून को प्रदर्शन-नियंत्रण शपथपत्र जारी किया था, जिसमें 11 शर्तें रखी गई थीं जैसे कि प्रदर्शन से पहले प्रशासन से अनुमति लेना, केवल तय स्थान पर प्रदर्शन करना, बाहरी व्यक्तियों को शामिल न करना और संपत्ति को नुकसान न पहुंचाना आदि। इन शर्तों को छात्रों ने लोकतंत्र-विरोधी बताते हुए तुरंत विरोध शुरू किया। विरोध की शुरुआत पॉलिटिकल साइंस विभाग के मशाल मार्च से हुई, फिर यह पूरे कैंपस में फैल गई। दिवाली पर छात्रों ने रंगोलियों और स्टिकरों से विरोध दर्ज कराया। छात्राओं मनप्रीत कौर, दीक्षा, सृष्टि, नवप्रीत कौर और नम्रित ने विभागों में जाकर अभियान को आगे बढ़ाया। एबीवीपी को छोड़कर सभी छात्र संगठनों ने इसमें भाग लिया।

दो धरने, एक भूख हड़ताल, 17 संगठनों का गठजोड़

पिछले एक हफ्ते से यह मुद्दा और भी गरमा गया था। वीसी कार्यालय के बाहर दो मोर्चे सक्रिय थे। एक तरफ अभिषेक डागर की भूख हड़ताल, तो दूसरी ओर पीयूसीएसी वाइस प्रेजिडेंट अश्मीत सिंह और संयुक्त सचिव मोहित मंदेरणा के नेतृत्व में 17 संगठनों का धरना। इन्हीं ने मिलकर एंटी एफिडेविट फ्रंट बनाया था।

प्रशासन बोला: विद्यार्थियों के हित में लिया फैसला

पीयू अथॉरिटी ने बयान जारी कर कहा कि यह फैसला विद्यार्थियों के हित में लिया गया है ताकि शैक्षणिक गतिविधियां सुचारू रूप से चल सकें। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि आंदोलनरत छात्रों ने अपने कानूनी मामले वापस लेने पर सहमति जताई है।

पहले दिन से संघर्ष के साथ रहा अमर उजाला

इस मुद्दे को अमर उजाला ने पहले दिन से प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला ने न सिर्फ पीयू छात्रों को दफ्तर बुलाकर संवाद कराया बल्कि जेएनयू, हैदराबाद यूनिवर्सिटी और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों से भी चर्चा की। दिवाली पर रंगोली विरोध और स्टिकर अभियान की खबरें भी सबसे पहले यहीं प्रकाशित की गईं।
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