कांग्रेस पांच साल तक संगठन पर कब्जे को लेकर लड़ती रही, इनका प्रदेश में संगठन ही नहीं था। सारी लड़ाई हमने विधानसभा में लड़ी, कांग्रेस ने नहीं। बावजूद लोगों ने कांग्रेस में जान डालने का काम किया। कांग्रेस में कोई सर्वमान्य नेता नहीं था, फिर भी 15 से 31 सीटों पर पहुंच गए। ये कारण तलाशने होंगे कि कैसे बिना नेतृत्व के वे सत्ता की ओर बढ़ रहे थे।
भाजपा को 40 सीट विपक्ष का वोट बंटने की वजह से मिली हैं। भाजपा का 25 फीसदी वोट प्रतिशत लोकसभा से कम हुआ है। उन्हें सत्ता में रहने का अधिकार नहीं है। अधिकांश कैबिनेट हार गई। मुख्यमंत्री भी हार सकते थे, लेकिन उनके सामने कोई मजबूत और विश्वसनीय चेहरा नहीं था। जजपा दस सीटें जरूर जीती है, लेकिन उसमें से सात दूसरे दलों से आए नेता जीते हैं। आज उन पार्टियों का गठबंधन हुआ है जो चुनावों में एक-दूसरे को कोसते नहीं थक रही थीं। यह स्वार्थ का गठबंधन है, लोगों के हितों का गठबंधन नहीं है।
अभय ने कहा कि जजपा को हमारे कार्यकर्ता अपशगुन मानते हैं। हरियाणा में भाजपा और जजपा का गठबंधन, ठगबंधन के साथ ही पप्पू और गप्पू का गठबंधन है। आज डिप्टी सीएम व मंत्रियों के लिए विभाग मांगे जा रहे हैं, जबकि सेवा करने वाले विभाग नहीं मांगते। ये स्वार्थी लोग ज्यादा दिन तक साथ चलने वाले नहीं है। जल्दी यह गठबंधन टूटेगा और यह खंडित जनादेश चुनाव की तरफ जाएगा।
अजय मिलने आए तो क्यों नहीं की परिवार एक करने की बात
अभय सिंह ने कहा है कि अजय चौटाला जब मुझसे मिलने आए थे तो परिवार को एक करने की बात क्यों नहीं की। पीठ पीछे बोलने की जरूरत नहीं है, सामने आकर बोलें। यह तो बाप, दादा व प्रकाश सिंह बादल के बोलने पर एक नहीं हुए, खाप पंचायतों का आग्रह तक इन्होंने नहीं माना।