लोक सभा चुनाव में पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की शानदार जीत के बाद संगठन पर कब्जे को लेकर हुई जद्दोजहद पर शीर्ष नेतृत्व ने विराम लगा दिया है।
पार्टी की दिल्ली से आई तीन मेंबरी कमेटी ने साफ कर दिया है कि कोई भी पदाधिकारी ऊपर से थोपा नहीं जाएगा। जिले हों या राज्य, वॉलंटियर्स की सहमति से ही पदाधिकारी बनेंगे।
सहमति न बनी तो वोटिंग कराई जाएगी। पार्टी के इस फैसले से कैडर में सुलग रही विरोध की चिंगारी फिलहाल शांत हो गई है।
चुना जाएगा फेस ऑफ पंजाब
लोक सभा चुनाव में आप ने पंजाब में चार सीटें जीती हैं। पार्टी ने 117 में से 33 विधानसभा हलकों में लीड हासिल की। इसके बाद कुछ नेताओं को सीएम की कुर्सी नजर आने लगी, जिसका रास्ता सूबा कंवीनर के पद से होकर जाता था।
जो सूबा कंवीनर बनता, वही पार्टी का ‘फेस ऑफ पंजाब’ भी होता। इस पद के लिए जद्दोजहद शुरू हुई तो बड़े पैमाने पर विरोध भी आरंभ हो गया।
इसके बाद राष्ट्रीय नेतृत्व ने मनीष सिसोदिया, जरनैल सिंह और राघव चड्ढा को हालात का जायजा लेने पंजाब भेजा था। पंजाब में मिशन विस्तार केलिए 17 जून को पहुंची कमेटी का दौरा रविवार को पूरा हो गया।
कमेटी ने सभी लोक सभा हलकों में जाकर वॉलंटियर्स से फीडबैक लिया। रविवार को कमेटी ने होशियारपुर, आनंदपुर साहिब व फतेहगढ़ साहिब हलकों के वर्करों केसाथ मीटिंग की। अब कमेटी राष्ट्रीय कार्यकारिणी को रिपोर्ट देगी।
नीचे से ऊपर तक चुनाव
जानकारी के मुताबिक कमेटी ने साफ कर दिया है कि सबसे पहले 10-11 मेंबरी बूथ लेवल कमेटियां बनाई जाएंगी। सभी जगह वर्करों ने कहा कि इन कमेटियों में उन लोगों को तरजीह दी जाए, जिन्होंने चुनाव में पार्टी का झंडा उठाया।
बूथ कमेटियों के बाद 24 गांवों का ब्लॉक बना कर उसकी कमेटी बनाई जाएगी। हर ब्लॉक से 1-2 लोग लेकर जिला और हर जिले से 1-2 लोग लेकर सूबा कमेटी बनाई जाएगी।
ब्लॉक, जिला और सूबा कमेटियों के कंवीनर सर्वसम्मति या वोटिंग से चुने जाएंगे। सिसोदिया ने बूथ कमेटियों के लिए वॉलंटियर्स का चयन शुरू करने को कहा है।
वर्करों का कहना था कि जल्द से जल्द संगठन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए ताकि उप चुनाव में दिक्कत न आए। सिसोदिया ने उन्हें भरोसा दिया है कि एक हफ्ते में योजना तैयार कर उन्हें सूचित कर दिया जाएगा।
फूलका के ऐलान के बाद हुआ था विवाद
चुनाव के बाद मिली जीत से उत्साहित एक जिले के कुछ नेताओं ने लुधियाना से चुनाव हारे एडवोकेट एचएस फूलका को पंजाब का कंवीनर घोषित कर दिया। इसके साथ ही बगावत शुरू हो गई।
चार में से तीन सांसद भी इसके खिलाफ हो गए, हर तरफ विरोध हुआ। बेचैनी बढ़ने लगी, आए दिन वर्कर और नेता दिल्ली जाकर पंजाब में संगठन के बारे में स्थिति साफ करने की मांग करने लगे।
जिसके बाद हाईकमान को साफ करना पड़ा कि फूलका को कंवीनर नियुक्त करने का कोई फैसला नहीं हुआ है। फिर हाईकमान ने विवाद शांत करने और सही फीडबैक लेने को तीन मेंबरी कमेटी यहां भेजी।