जिस तरह से योगेंद्र यादव समेत चार लोगों को निकाला गया, उससे सहमत नहीं हूं। वे पार्टी के स्तंभ थे, पार्टी खड़ी की थी। उन्हें इस तरह से निकालना पार्टी के हित में नहीं है। यह कहना है पंजाब के पटियाला से आप सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी का। लोकसभा में आप के नेता पद से हटाए जाने के बावजूद पटियाला के सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी के रुख में कोई नरमी नहीं आई है।
आप सांसद ने कहा है कि वह किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिन उद्देश्यों और उसूलों को लेकर वह पार्टी में आए थे, उनका हनन हुआ तो आवाज उठाते रहेंगे। गांधी ने योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण समेत चार नेताओं को आप से निकाले जाने का भी विरोध किया है।
सांसद ने कहा कि वह किसी व्यक्ति विशेष या विशेष व्यक्तियों के लिए पार्टी में नहीं आए। आंतरिक लोकतंत्र, स्वराज से पार्टी भटकेगी तो आवाज उठाएंगे। अगर किसी को तकलीफ होती है तो उन्हें चिंता नहीं है। उनकी प्रतिबद्धता किसी व्यक्ति के लिए नहीं, पार्टी के लिए है। वह हां में हां नहीं मिलाएंगे। पटियाला के लोगों ने चुना है, पांच साल तक उनकी सेवा करूंगा।
अपने उसूलों का हनन देखकर चुप नहीं रह सकता
आप ने डॉ. गांधी को संसदीय दल के नेता पद से हटा कर भगवंत मान को जिम्मेदारी सौंपी है। डॉ. गांधी ने कहा कि भगवंत मान उनके दोस्त हैं, वह मान का स्वागत करते हैं। संसदीय दल का नेता होना कोई मुद्दा ही नहीं है।
उन्होंने नेता पद या सांसद बनने के लिए पार्टी ज्वाइन नहीं की थी। वह सिस्टम बदलने और वैकल्पिक राजनीति करने आए थे। वह नेता पद पर या सांसद रहे बगैर भी कर सकते हैं। जब भी उन्हें कुछ गलत लगा, उन्होंने आवाज बुलंद की। स्वराज, पारदर्शिता और आंतरिक लोकतंत्र का हनन हुआ तो वह आवाज उठाते रहेंगे।
डॉ. गांधी ने कहा कि वह चालीस सालों से लोकतंत्र और इन मूल्यों के लिए लड़ते आए हैं। इमरजेंसी में जेल भी काटी। अब उसूलों का हनन देख कर चुप रहें, यह नहीं हो सकता। वह अपने, पंजाब और देश के प्रति जवाबदेह हैं।
न तो गांधी छोड़ेंगे, न ही उन्हें पार्टी निकालेगी
योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण के हक में आवाज बुलंद करने वाले डॉ. धर्मवीर गांधी को आखिर उम्मीद के मुताबिक संसदीय दल के नेता पद से हाथ धोना पड़ा। डॉ. गांधी के खिलाफ पार्टी में दबाव बढ़ता जा रहा है। पर न तो गांधी पार्टी छोड़ेंगे और न ही पार्टी उन्हें निकालने के मूड में है।
डॉ. गांधी अगर पार्टी छोड़ते हैं तो उनकी संसद सदस्यता चली जाएगी, लेकिन अगर आप डॉ. गांधी को निकालती है तो वह पटियाला के सांसद बने रहेंगे। इसलिए न तो वह पार्टी छोड़ेंगे और न ही पार्टी उन्हें निकालेगी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व फिलहाल गांधी के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने के मूड में है।
पहले ही गांधी के खास लोगों पर दबाव डाल कर उन्हें विरोध में खड़ा किया जा चुका है, जिसके चलते गांधी बिल्कुल अलग-थलग पड़ गए हैं। पहले पटियाला से टिकट के दावेदार डॉ. बलबीर सिंह, फिर उम्मीदवार हरजीत सिंह अदालतीवाला खिलाफ हुए। इसके बाद गांधी के राइट हैंड पटियाला के कन्वीनर जरनैल सिंह भी विरोध में आ गए।
इसके अलावा पार्टी संसद में भी डॉ. गांधी को धर्म संकट में डाल सकती है। किसी मुद्दे पर अगर पार्टी व्हिप जारी करती है और उस मुद्दे पर डॉ. गांधी की राय अलग हो, तो मुश्किल खड़ी हो सकती है। व्हिप का उल्लंघन करने पर पार्टी डॉ. गांधी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। हालांकि, डॉ. गांधी कहते हैं कि ऐसी नौबत नहीं आएगी, क्योंकि वह पार्टी के उसूलों से सहमत हैं। अगर जाति-धर्म, सांप्रदायिकता या भ्रष्टाचार पर बात आई तो विरोध करेंगे।