पंजाब के दलित वोट बैंक पर अब आम आदमी पार्टी (आप) की पैनी नजर है। पिछले दिनों अकाली दल द्वारा बसपा के टाप नेताओं को अपने पाले में खींचने के बाद अब आप भी इस वोट बैंक को लुभाने में जुटी है। यही कारण है कि मायावती के प्रति भाजपा नेता द्वारा अपशब्दों का उपयोग करने के मामले को आप पंजाब में जोरशोर से उठाने के अलावा जगह जगह दलित रैलियों का आयोजन कर रही है। पूरे पंजाब में कुल मतदाताओं में 32 फीसदी दलित मतदाता हैं, जो देश के किसी भी राज्य में सबसे ज्यादा औसत है। भाजपा की नजर मुख्य तौर पर दोआबा के उन क्षेत्रों पर है, जहां दलितों का अच्छा खासा वोट बैंक है और वह किसी भी पार्टी को चढ़ाने और उतारने की क्षमता रखते हैं।
दलितों पर पकड़ रखने वाली बहुजन समाज पार्टी का पंजाब में पिछले कुछ सालों से ग्राफ लगातार लुढ़का है। पंजाब में बसपा का श्रेष्ठ प्रदर्शन 1992 में हुआ था, जब उन्होंने 16.32 फीसदी मत हासिल करते हुए नौ सीटों पर कब्जा किया था। हालांकि 1997 में बसपा का वोट प्रतिशत अचानक गिरकर 7.48 फीसदी रह गया और उन्हें एक सीट पर ही जीत मिली थी। पिछले चुनाव में उसका मत प्रतिशत 4.29 फीसदी रह गया था, जिसका मुख्य कारण अन्य राजनतिक दलों की दलित वोटों पर सेंध थी। दोआबा क्षेत्र के दलित वोट बैंक पर कांग्रेस की पकड़ भी ढीली पड़ी और इसका लाभ अकाली-भाजपा ने प्राप्त किया था। यही कारण है कि आप इस बार दोआबा में पैनी नजर गड़ाए बैठी है।
आप के शीर्ष नेता और पंजाब के कनवीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर कहते हैं कि सड़क से लेकर संसद तक गुजरात में दलितों पर अत्याचार और बसपा प्रमुख कुमारी मायावती को अपशब्द बोलने जैसे मुद्दों पर भाजपा बुरी तरह घिरी हुई है। भगवंत मान के वीडियो की आड़ में दलितों के ज्लालित मुद्दे से ध्यान बांटना चाहती है। छोटेपुर ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस ने भाजपा के साथ मौसेरे भाई की भूमिका निभाई है, क्योंकि कांग्रेस नहीं चाहती कि दलितों के मुद्दे पर संसद में इतनी गंभीर बहस हो कि कांग्रेस के शासनकाल दौरान दलितों पर हुए अत्याचारों की लंबी सूची दोबारा चर्चा में आ जाये। यहीं वजह थी कि जब बुधवार को संसद में गुजरात के दलितों पर हुये अत्याचार को लेकर बवाल मचा हुआ था तब कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी अपनी सीट पर मजे से सो रहे थे। लेकिन आप दलितों के सम्मान के लिए संघर्ष करती रहेगी।