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हरियाणा चुनाव में 'आप' का बड़ा फैसला

Fri, 12 Sep 2014 01:09 PM IST
डीडी गोयल/अमर उजाला, डबवाली (सिरसा)
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित जीत दर्ज करने वाली आम आदमी पार्टी पर प्रदेश के वोटरों और नेताओं की निगाहें टिकी हुई हैं। आप नेता पहले ही विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी न उतारने का ऐलान कर चुके हैं।
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ऐसे में अब सभी यह सोच रहे हैं कि आप किसे समर्थन देगी या चुनाव में उनका अगला कदम क्या होगा। आप की प्रदेश इकाई के सदस्य प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा से संवाददाता ने चुनाव की रणनीति पर बात की।

पार्टी विस्तार करने का नहीं लड़ा चुनाव

सवाल : इस बार पार्टी हरियाणा विधानसभा चुनाव में क्यों नहीं उतर रही?
जवाब : पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक सुनाम (पंजाब) में हुई थी। इसमें अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल सहित हरियाणा की प्रदेश स्तरीय आठ सदस्यीय इकाई ने भाग लिया था। प्रदेश के कार्यकर्ताओं की भावनाओं को हमने राष्ट्रीय कार्यकारिणी के समक्ष रखा था। हम भी चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन राष्ट्रीय इकाई ने हरियाणा में चुनाव लड़ने से साफ मना कर दिया।

सवाल : क्या राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने कार्यकर्ताओं की कद्र नहीं समझी।
जवाब : राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने फैसला सोच-समझकर लिया है। पार्टी का गठन हुए अभी करीब एक वर्ष हुआ है। साधन सीमित हैं। ऐसे में पार्टी केवल संगठन विस्तार पर जोर दे रही है।

चार लाख लोग हरियाणा में 'आप' से जुड़े

सवाल : हरियाणा में कितने कार्यकर्ता हैं।
जवाब : पिछले दिनों आप का सदस्यता अभियान चला था। पूरे प्रदेश से करीब चार लाख सदस्य बने थे। लोकसभा चुनाव में करीब पांच लाख लोगों ने आप पर भरोसा जताया था।

सवाल : आप ने चुनाव न लड़ने का फैसला लिया है, फिर कार्यकर्ताओं का क्या होगा।
जवाब : जो सवाल आपने किया है, वही सवाल कार्यकर्ता कर रहे हैं। कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही, ऐसी स्थिति में किस पार्टी को वोट दें। उन्हें जवाब दिया जा रहा है कि ईवीएम मशीन में नोटा का बटन भी है। उसे दबाया जा सकता है।
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नोटा का बटन दबाएंगे 'आप' कार्यकर्ता

सवाल : क्या सभी कार्यकर्ता नोटा का बटन दबाएंगे?
जवाब : इसकी कोई गारंटी नहीं है। चूंकि अगर प्रदेश के चार लाख लोग जागरूक हो तो प्रदेश की तस्वीर बदल जाए। अब तक प्रदेश में जिस भी राजनीतिक पार्टी के पास सत्ता आई है, उसने लूटने का काम किया है। लुटेरों से हमें नफरत है। इसलिए विरोधस्वरूप नोटा का बटन दबाएंगे।

सवाल : आपकी पार्टी चुनाव का बहिष्कार करेगी?
जवाब : नहीं, ऐसा नहीं है। चुनाव का बहिष्कार नहीं करेंगे। नोटा दबाकर विरोध दर्ज करवाएंगे।

सवाल : पार्टी की आगामी रणनीति क्या है?
जवाब : देखिये हम चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। इसका यह मतलब नहीं कि हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे। हम जनता का घोषणापत्र तैयार कर रहे हैं। इस घोषणापत्र को प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में ले जाकर बांटा जाएगा। लोगों को जागरूक किया जाएगा। लोगों को वोट मांगने आने वाले प्रत्याशियों से घोषणा पत्र के आधार पर सवाल पूछने के लिए तैयार किया जाएगा।
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