केंद्र की मोदी सरकार ने वीरवार को संसद में अपना अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। बजट प्रावधान माइक्रो स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (एमएसएमई) उद्योगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। इससे लघु उद्यमियों में निराशा का आलम है। नोटबंदी के बाद जीएसटी की मार झेल रहे उद्यमियों को बजट में बूस्टर डोज मिलने की उम्मीद थी, लेकिन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। उद्यमियों का मानना है कि बजट में उद्योग जगत को पटरी पर लाने, निर्यात को बढ़ावा देने, मैन्यूफैक्चरिंग में गति प्रदान करने का कोई उपाय नहीं किया गया है।
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स (सीआईसीयू) के बैनर तले उद्यमियों ने बजट प्रावधानों पर मंथन के लिए पार्क प्लाजा में एक पैनल मंथन आयोजित किया गया। वहीं बजट भाषण खत्म होने के साथ ही अधिकतर उद्यमी निराश ही नजर आए। चैंबर के प्रधान उपकार सिंह आहूजा ने कहा कि मोदी सरकार का बजट उद्योग जगत की उम्मीदों पर कतई खरा नहीं उतरा। नोटबंदी एवं जीएसटी की सबसे अधिक मार छोटे उद्योगों पर पड़ी थी, लेकिन इस सेक्टर की पूरी तरह से अनदेखी की गई है। टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट को लेकर कुछ नहीं किया गया है।
पंजाब प्लाइवुड मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक जुनेजा ने कहा कि बजट में 250 करोड़ की टर्नओवर वाले उद्योगों पर 25 फीसदी आयकर लगाने की बात की गई है, लेकिन यह प्रावधान कारपोरेट सेक्टर के लिए है। छोटे छोटे उद्यमियों को इसका फायदा नहीं मिलेगा। वहीं छोटे उद्योगों की संख्या 90 फीसदी से अधिक है। उनके हाथ खाली ही रहे हैं। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों को भी आयकर में किसी भी तरह की बड़ी छूट नहीं दी गई है।