पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान।
- फोटो : फाइल
संगरूर लोकसभा उपचुनाव में मिली शिकस्त के बाद आम आदमी पार्टी चिंतन मंथन करेगी। पार्टी नेताओं ने माना है कि कुछ कमियां रह गईं होंगी जिनके कारण हार हुई है। कुछ पार्टी के नेताओं ने कहा कि संगरूर मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह क्षेत्र है, यहां पार्टी का दो प्रतिशत वोट शेयर गिरना चिंता की बात है। वहीं कुछ वरिष्ठ नेताओं ने हार का कारण जून महीने की छुट्यिां और धान की बिजाई को बताया।
संगरूर चुनाव में मिली हार पर पार्टी के नेताओं का कहना है कि दिल्ली में भी ऐसा हुआ था कि विधानसभा चुनाव पार्टी जीत गई थी लेकिन लोकसभा चुनाव में हार गए थे। शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन के शासन में चार सीटें आम आदमी पार्टी जीत कर ले गई थी। कांग्रेस के शासन में 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान संगरूर से भगवंत मान दूसरी बार जीतकर कर सांसद बने थे।
लोगों का फतवा सिर माथे, बेहद कड़े मुकाबले में हार हुई: आप
नतीजे पर आम आदमी पार्टी (आप) ने कहा कि लोगों के फतवे का वह सिर झुकाकर सम्मान करते हैं। आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने सिमरनजीत सिंह मान को जीत की बधाई दी और कहा की बेहद कड़े मुकाबले में आप उम्मीदवार की हार हुई है।उन्होंने कहा कि इस चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 2019 लोकसभा चुनाव की तुलना में मात्र दी फीसदी कम हुआ है। जबकि अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा की जमानत जब्त हो गई। इस बार आम आदमी पार्टी को 34.65 प्रतिशत वोट मिले हैं, वहीं भाजपा को 9 फीसदी, कांग्रेस को 11 और अकाली को 6 प्रतिशत वोट मिले हैं।
कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2019 लोकसभा में 27 प्रतिशत था, जो इस चुनाव में घटकर सिर्फ 11 फीसदी रह गया है। अकाली दल को 2019 में 24 फीसदी वोट मिले थे, जो अब सिर्फ 6 प्रतिशत रह गया है। यह दिखाता है की जनता अब रिवायती पार्टियों के साथ नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी जीत-हार से घबराने वाली पार्टी नहीं है। वह लोगों के बीच हैं और आगे भी लोगों के बीच रहेंगे। पार्टी ने पहले भी ऐसी बहुत हार-जीत देखी हैं।
2014 लोकसभा चुनाव में दिल्ली में हमें एक सीट भी नहीं मिली थी लेकिन 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीट जीतकर हमने सरकार बनाई। 2019 लोकसभा चुनाव में भी हमारा प्रदर्शन खराब रहा लेकिन 2020 में आप ने दोबारा दिल्ली विधानसभा चुनाव जीते और 2022 में प्रचंड बहुमत के साथ पंजाब में उनकी सरकार बनी। संगरूर उपचुनाव के नतीजे को बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। वे इसकी समीक्षा करेंगे और इस पर विचार करेंगे।