इतना ही नहीं इस चुनाव में आप हरियाणा की सभी कुल 90 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी तक नहीं उतार पाया। आम आदमी पार्टी ने 46 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे, जिसमें से एक भी प्रत्याशी भी जीत नहीं पाया। आम आदमी पार्टी ने चुनाव में केजरीवाल के ‘दिल्ली मॉडल’ को ही जोर-शोर से उठाया था, जबकि मनोहर सरकार-वन की कथित नाकामियों का भी खूब ढिंढोरा पीटा गया था। लेकिन आप के सभी प्रयास बेअसर दिखाई दिए।
इतना ही नहीं दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल तक विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए हरियाणा नहीं आए। आप प्रवक्ता सुधीर यादव ने बताया कि सीएम अरविंद केजरीवाल दिल्ली में ही व्यस्त थे, इसलिए उनका चुनाव में हरियाणा दौरा नहीं हो पाया। उधर, इससे पहले आप ने हरियाणा में जननायक जनता पार्टी के साथ मिलकर मई 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भी आप-जजपा गठबंधन को कोई सफलता नहीं मिली।
हम मानते हैं कि चुनाव में प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। कमजोर संगठन और कम संसाधन इसकी एक वजह है। भले ही प्रदेश के लोगों ने आम आदमी पार्टी को वोट नहीं दिया, मगर मान-सम्मान बहुत ज्यादा दिया है। हम प्रदेश में और मेहनत करेंगे, जनता के बीच रहेंगे और उनकी समस्याओं व मुद्दों को लगातार उठाते रहेंगे। जल्द ही प्रदेश स्तरीय मंथन बैठक का आयोजन होगा। - नवीन जयहिंद, प्रदेशाध्यक्ष, आप