फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चंडीगढ़ निगम चुनाव: आप ने 2014 में पहली बार लड़ा था लोकसभा चुनाव, ऐसे शून्य से शिखर तक का सफर किया तय

Tue, 28 Dec 2021 03:41 PM IST
ajay kumar नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

आप ने चुनाव से पहले वादों की झड़ी लगाई है। वहीं, प्रत्याशियों ने अपने स्तर पर भी वार्डों की योजनाओं को लोगों के सामने रखा। अब विपक्षियों के सामने इन योजनाओं को धरातल पर लाने की चुनौती आप के सामने होगी। वहीं, अधिकारियों से उन कार्यों को कराना भी प्रत्याशियों के लिए आसान नहीं होगा।
विज्ञापन
आम आदमी पार्टी (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

चंडीगढ़ में शून्य से शिखर तक का सफर तय करने में आम आदमी पार्टी की सात साल की मेहनत है। साल 2014 में आम आदमी पार्टी पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरी। कड़ी टक्कर देने के बाद बेशक पार्टी हार गई लेकिन विपक्षियों को अपनी ताकत का पूरा अहसास कराया था लेकिन इसके बाद पार्टी निष्क्रिय रही। निगम चुनाव से ठीक पहले जनता के मन में तीसरे विकल्प को लेकर उठ रहे गुबार को आप ने सही समय पर पहचान लिया। 

विज्ञापन


पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया। कृषि कानून बिल और महंगाई पर जनता के आक्रोश को अपना हथियार बनाया। उस हथियार से स्थानीय मुद्दों का ढांचा तैयार कर दिल्ली मॉडल से तुलना की और जीत की नई तस्वीर उभर कर सामने आ गई। शहर में आप का जनाधार तो वर्ष 2014 में ही तैयार हो गया था। 

लोकसभा चुनाव में आप प्रत्याशी गुलपनाग के सामने वर्तमान भाजपा सांसद किरण खेर थीं। मोदी लहर के उस दौर में भी उन्हें 108679 वोट मिले थे। उस दौरान आप का वोट प्रतिशत करीब 24 प्रतिशत रहा था, जो कांग्रेस उम्मीदवार पवन बंसल से मात्र ढाई प्रतिशत से कम था। यह पहली बार था, जब शहर में किसी तीसरे विकल्प को एक लाख से ज्यादा वोट मिले हों। हालांकि, इसके बाद इस जनाधार को लगातार बरकरार रखने में आप असफल रही। बावजूद इसके आप ने अपने आप को फिर से खड़ा किया और निगम चुनाव में 14 सीटें लाकर सभी को चौंका दिया।  
विज्ञापन


छाबड़ा के आने से मिला बल, विरोध के बावजूद नहीं हुए अडिग
आप बेशक दिल्ली मॉडल और केजरीवाल की योजनाओं के बलबूते शहर में चुनाव लड़ी हो लेकिन इसके सूत्रधार प्रदीप छाबड़ा रहे। उनके आने से पहले असमंजस की स्थिति थी कि आप निगम चुनाव लड़ेगी भी या नहीं। छाबड़ा ने कांग्रेस छोड़ने के बाद आप का दामन थामा और अपने भरोसेमंद लोग भी लाए। पुराने कार्यकर्ताओं और नए कार्यकर्ताओं के विचारों में टकराव हुआ। इस टकराव की गूंज दिल्ली तक पहुंची और वहां के पदाधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा लेकिन छाबड़ा टस से मस नहीं हुए। अपने निर्णयों पर वह अडिग रहे, उसी का परिणाम है कि आज आप सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर के सामने आई।

पंजाब के लिए तैयार हो गई पृष्ठभूमि
आगामी पांच राज्यों के लिए इस चुनाव को लिटमस टेस्ट माना जा रहा था। यह चुनाव आप के लिए संजीवनी का काम करेगा। एक तरफ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ गया। वहीं भाजपा, कांग्रेस व अकाली के लिए सीधा-सीधा सोचने पर मजबूर कर दिया है। अब आप पंजाब में थोड़ा और जोर लगाएगी, वहीं उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लिए भी तैयारियां शुरू करेगी। चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब के लिए आप ने अपनी पृष्ठभूमि तैयार कर ली है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें