आर्य समाज के पुरोध आचार्य बलदेव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, योग गुरु बाबा रामदेव तथा स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज रविवार को कालवा गुरुकुल में पहुंचेंगे।
राज्यपाल, बाबा रामदेव तथा स्वास्थ्य मंत्री के शोक सभा में पहुंचने की सूचना मिलते ही प्रशासन तैयारियों में जुट गया है। हैलीकॉप्टर के लैंड करवाने के लिए पिल्लूखेड़ा गांव के पास स्थित एफएस कान्वेंट स्कूल में हैलीपेड तैयार किया गया है। गुरुकुल कालवा के प्रभारी आचार्य राजेंद्र के अनुसार सभा सुबह दस से दोपहर एक बजे तक होगी।
एक नजर में आचार्य बलदेव का जीवन परिचय
आर्य समाज के महा नायक एवं योग गुरु बाबा रामदेव के गुरु आचार्य बलदेव की कालवा कर्मभूमि रही है। सोनीपत जिले की गोहाना तहसील के गांव सरगथल में गुगनराम के घर 25 अक्तूबर 1932 को जन्मे आचार्य बलदेव झज्जर गुरुकुल से वैदिक शिक्षा ग्रहण करने के बाद जून 1971 में कालवा गुरुकुल में आए।
यहां पर उन्होंने आर्य समाज का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ छोटे बच्चों को वैदिक शिक्षा देने का काम किया। योग गुरु रामदेव ने भी कालवा गुरुकुल में रहकर आचार्य बलदेव से शिक्षा ग्रहण की। 1990 में आचार्य ने धड़ौली गांव में एक गोशाला की स्थापना की, जो आज राष्ट्रीय गोशाला का दर्जा हासिल हो चुका है।
इसके बाद धड़ौली गांव में ही आचार्य के सानिध्य में ईटीटी रिसर्च सेंटर धड़ौली की स्थापना की गई। आचार्य बलदेव आर्य सार्वदेशिक प्रतिनिधि सभा दिल्ली के प्रधान व आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के प्रधान भी रहे हैं। आचार्य बलदेव 1999 के बाद रोहतक चले गए। उन्होंने वैदिक संस्कृति पर कई पुस्तकें भी लिखी हैं।
आचार्य बलदेव ने लगभग 16 वर्ष पहले गुरुकुल कालवा का कार्यभार आचार्य राजेंद्र को सौंप दिया था। इसके बाद से अब तक आचार्य राजेंद्र ही कालवा गुरुकुल का कामकाज संभाल रहे हैं।
गोहत्या बंद करवाने के लिए किया संघर्ष
आचार्य बलदेव ने आर्य समाज के प्रचार-प्रसार के साथ गोहत्या को बंद करवाने के लिए भी संघर्ष किया। उन्होंने हरियाणा में गोहत्या पर नकेल कसते हुए हरियाणा में चल रहे कई हत्थे बंद करवाए।
आचार्य ने स्वयं गोसेवा करने के साथ युवाओं को भी गोसेवा के लिए प्रेरित किया। प्रदेश में गोहत्या पर जो कानून बना है, वह आचार्य बलदेव के संघर्ष का ही परिणाम है।