यूटी प्रशासन शहर के लिए एक और आईटी विजन लेकर हाजिर है। चंडीगढ़ के लिए आईटी और इलेक्ट्रानिक्स पॉलिसी आईटी विजन-2020 को शनिवार को जारी कर दिया गया।
इसमें तय किया गया है कि चंडीगढ़ के हर घर से कम से कम दो व्यक्तियों को ई-लिट्रेट बनाया जाएगा, जिनमें से एक महिला होगी।
इस विजन के अनुसार निकट भविष्य में चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाया जाएगा। प्रशासन का आईटी विभाग पिछले डेढ़ साल से आईटी पॉलिसी बना रहा था अब प्रशासक शिवराज पटिल की मंजूरी के बाद इसे जारी कर दिया है।
आईटी और इलेक्ट्रानिक्स पॉलिसी को लागू कर चंडीगढ़ देश के चुनिंदा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में शामिल हुआ है जहां संयुक्त रूप से आईटी और इलेक्ट्रानिक्स की पॉलिसी बनी है।
यह पॉलिसी देश की आईटी, टेलीकम्युनिकेशंस, इलेक्ट्रानिक्स और साइबर सिक्योरिटी से संबंधित राष्ट्रीय पॉलिसी का हिस्सा होगी। इस आईटी पॉलिसी को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक्शन प्लान बनाएगा।
युवा उद्यमियों के लिए फंड
इस आईटी पॉलिसी में युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर फोकस किया गया है। युवा उद्यमियों को फंड उपलब्ध कराने के लिए 20 करोड़ का कोष बनाया जाएगा।
विजन-2010 के सपने अभी अधूरे
चंडीगढ़ प्रशासन के आईटी विभाग की ओर से वर्ष 2005 में आईटी विजन-2010 की घोषणा की गई थी।
आठ साल पहले आईटी विजन-2010 की घोषणा के साथ ही शहर के लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे, लेकिन आईटी विजन-2010 की योजनाएं पूरी तरह लागू नहीं हो सकी हैं।
शहर में अभी तक ई गवर्नेंस प्रोजेक्ट पूरी तरह से लागू नहीं हो सका है। चंडीगढ़ के लोगों को आईटी से जुड़ी सुविधाएं देने के लिए जनसंपर्क प्रोजेक्ट शुरू होना था।
इसके तहत 50 जनसंपर्क कियॉस्क स्थापित होने थे। हर सेक्टर में एक और महत्वपूर्ण सेक्टरों में दो, लेकिन यह प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो सका। आईटी विजन-2010 में चंडीगढ़ के हर नागरिक को मल्टी सर्विस स्मार्ट कार्ड दिया जाना था।
इस कार्ड का लोग प्रशासन और भारत सरकार के किसी भी कार्यालय में उपयोग कर सकते थे, लेकिन मल्टी सर्विस स्मार्ट कार्ड पर काम ही नहीं शुरू हुआ।
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