यौन उत्पीड़न का केस दर्ज होने के बाद पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलाजी के डिप्टी डायरेक्टर प्रो.एएम कालरा की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
पेक में शिक्षकों का एक गुट उनके खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में है। उनको डिप्टी डायरेक्टर के पद से हटाने के लिए दबाव बनाया जाएगा।
वैसे भी प्रो. कालरा का डिप्टी डायरेक्टर के तौर पर कार्यकाल खत्म हो चुका है और वह कार्यवाहक के तौर पर इसका प्रभार संभाले हुए हैं।
प्रो.कालरा पेक में वरिष्ठतम प्रोफेसर हैं और उन्हें वर्ष 2015 में रिटायर होना है। प्रो. कालरा पेक सीनेट और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के भी सदस्य हैं।
प्रो. कालरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन डिप्टी डायरेक्टर के पद पर जल्द कोई फैसला कर किसी अन्य की नियुक्ति कर सकता है।
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हालांकि प्रशासन ने अधिकारी फिलहाल इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। उधर, कई शिक्षक प्रो.कालरा के बचाव में भी आ रहे हैं।
इन शिक्षकों का कहना है कि प्रो. कालरा का लंबा कैरियर काफी अच्छा रहा और वह कभी किसी विवाद में नहीं फंसे।
प्रो.कालरा की मजाक करने की आदत है और इसी आदत के कारण वह इस मामले में फंस गए हैं।
पेक की एसोसिएट प्रोफेसर की शिकायतों को जिस तरह से चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों ने नजरअंदाज किया है उससे यह स्पष्ट है कि प्रशासन इस मामले में गंभीर नहीं था।
महिला एसोसिएट प्रोफेसर ने पिछले तीन सालों में प्रशासन के अधिकारियों से कई बार मुलाकात की। लेकिन, उनकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया।
हालांकि प्रशासन ने तत्कालीन तकनीकी शिक्षा निदेशक गुरप्रीत कौर सपरा से मामले की जांच कराई थी।
महिला एसोसिएट प्रोफेसर का आरोप है कि प्रशासन के किसी अधिकारी ने उनकी शिकायत नहीं सुनी।
प्रशासक से लेकर वह तकनीकी शिक्षा सचिव तक से कई बार मिलीं। लेकिन, प्रशासन के अधिकारियों ने हर बार उनकी शिकायतें अनसुनी कर दी थीं।
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