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सीनेट बैठक : पीयू डेंटल कॉलेज शिक्षकों की पदोन्नति नीति बनाने के लिए बनेगी नई कमेटी

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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के डेंटल कॉलेज के शिक्षकों को पदोन्नति देने के लिए नई नीति बनेगी। इसके लिए कमेटी गठित होगी। यह निर्णय दो साल बाद हुई सीनेट की बैठक में लिया गया। सभी सदस्यों के आए सुझावों का स्वागत किया गया।
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बैठक में कहा गया कि बिना देरी किए गए इन शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए। पहली बार सीनेट की बैठक में हंगामा नजर नहीं आया। हालांकि बैठक ऑनलाइन थी। ऐसे में कुछ सदस्यों को बोलने का मौका कम मिला। शिक्षकों, कर्मचारियों के पदोन्नति के मामलों के साथ ही कुछ नई तैनाती के प्रस्ताव भी पास किए गए। वहीं पुराने मुद्दे भी बैठक में निपटाए गए।
सीनेट की बैठक में पीयू वीसी प्रो. राज कुमार ने पीयू की उपलब्धियां बताईं। उनके बाद वरिष्ठ सीनेटर सत्यपाल जैन ने सभी सदस्यों का स्वागत करते कहा कि सिंडिकेट, डीन आदि का चुनाव नहीं हुआ है। फैकल्टी जो सीनेटरों को आवंटित की जानी हैं, वे भी अभी लंबित हैं। ऐसे में यह काम करने के लिए तैयारी करनी चाहिए।
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इसके बाद सीनेटर देवेंद्र सिंह ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पीयू ने माका ट्रॉफी से लेकर अटल रैंकिंग में बाजी मारी है। सीनेटर अमित जोशी ने सातवें वेतनमान का मुद्दा उठाया। हरमोहिंदर बेदी ने पीयू की उपलब्धियों के लिए वीसी को बधाई दी। सीनेटर डॉ. जगत भूषण, संदीप सीकरी आदि ने भी विचार रखे। उसके बाद कुछ प्रस्तावों को पास किया गया। इसी पर सीनेटर प्रो. रजत संधीर, डीपीएस रंधावा, नरेश गौड़ आदि ने विरोध दायर किया। उन्होंने कहा कि सीनेट की पहली बैठक दो साल बाद हुई है।
परिचय हुआ नहीं और प्रस्ताव किए जा रहे पास : केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश
जैसे ही कुछ सीनेटरों ने सीधे प्रस्ताव पास होने का विरोध दर्ज कराया तो फिर बोलने का मौका केंद्रीय मंत्री सोमप्रकाश को भी दिया गया। उन्होंने नाराजगी जताई कि बिना परिचय के ही सीधे प्रस्ताव पास किए जा रहे हैं। बैठक को सही ढंग से किया जाए, इसमें जल्दबाजी न हो। उन्होंने कहा कि तमाम सदस्य बैठे हैं और प्रस्ताव पास किए जा रहे हैं। साथ मिलकर काम करना है तो सभी को साथ लेकर चलना होगा। यह ज्ञान का मंदिर है, सियासत का अड्डा नहीं। उन्होंने पीयू को उपलब्धियों के लिए बधाई दी। केंद्रीय मंत्री की नाराजगी के बाद पीयू रजिस्ट्रार ने सभी सदस्यों का परिचय करवाया। चंडीगढ़ प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने कहा कि उनकी पहली बैठक है। सभी लोग मिलकर विश्वविद्यालय को आगे ले जाएंगे। सीनेटर डॉ. प्रवीन गोयल ने भी विचार रखे। सीनेटर डॉ. दिनेश कुमार ने एयर इंडिया के किराए को लेकर सवाल खड़े करते कहा कि पहले प्रस्ताव पास हुआ तो एयर इंडिया सरकारी थी। वहीं अब निजी हाथों में है, ऐसे में किराया आदि उसी अनुसार तय हो।
पीयू को बनाया जाए केंद्रीय विश्वविद्यालय
वरिष्ठ सीनेटर प्रो. गुरमीत सिंह ने कहा कि पीयू उत्तर भारत का बड़ा विश्वविद्यालय है। हर राज्य के विद्यार्थी यहां पढ़ते हैं। ऐसे में पीयू को आर्थिक संकट से न जूझना पड़े, इसलिए इसे केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया जाए। इसके लिए उन्होंने पहले भी प्रस्ताव उठाया था। ऐसा होने से छोटी-छोटी ग्रांट के लिए पंजाब पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। उन्होंने हरियाणा के कॉलेजों को भी पीयू में शामिल करने का प्रस्ताव रखते कहा कि वहां की सरकार पैसे देने को तैयार है। उन्होंने सीनेट की बैठक भी ऑनलाइन जारी रखने को कहा। डॉ. प्रभजीत ने कहा कि बैठक के एजेंडे में कुछ प्रस्ताव नए शामिल किए गए हैं, जो ठीक नहीं हैं। इस दौरान प्रो. ओपी कटारे का मुद्दा भी आया, जो कॉलेजों को मान्यता देने को लेकर था। इस पर पुटा अध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय कुमार ने कहा कि इस प्रकरण को अब बंद किया जाए। वरिष्ठ शिक्षकों का शोषण हो रहा है। डॉ. नीरू मलिक ने सातवें वेतनमान का मुद्दा उठाया। पूर्व वीसी प्रो. एके ग्रोवर ने भी पीयू की बेहतरी के लिए काम करने को कहा। डॉ. नरेश गौड़ ने एक वरिष्ठ सीनेटर की ओर से कहे गए गिरोह शब्द के प्रयोग पर आपत्ति दायर की।
कॉलेजों में शिक्षक नहीं, लेकिन छात्रों से ली जा रही फीस : डॉ. प्रभदीप
डॉ. प्रभदीप ने कॉलेजों को मान्यता देने वाले प्रस्ताव पर कहा कि तमाम कॉलेजों को मान्यता दी गई है। कॉलेेजों में शिक्षक तक नहीं हैं, पर छात्रों से फीस वसूली जा रही है। इसके लिए जांच कमेटी बनाई जाए। सीनेटर विक्की गिल ने कहा कि कॉलेजों की मान्यता की जांच करने के नाम पर खेल होता है। आज तक जो कमेटियां जांच के लिए बनाई गई हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। डॉ. दिनेश ने कहा कि एमफिल, पीएचडी की प्रवेश परीक्षा करवाई जा रही है, जबकि एमफिल को मान्यता नहीं है। ऐसे में उसे बंद करना चाहिए।
कई सीनेटरों के निशाने पर रहे डीयूआई
डीयूआई कई सीनेटरों के निशाने पर रहे। सीनेटर हनी ठाकुर ने कहा कि उनके पास कर्मचारियों की फाइलें पड़ी हैं। उनकी स्क्रीनिंग के लिए उनके पास समय नहीं है। अगला डीयूआई कौन होगा, यह अभी तय किया जाए। कई अन्य सीनेटरों ने भी मुद्दा उठाया। डीयूआई पर काम न करने का भी आरोप लगाया। अगले डीयूआई के नाम के प्रस्ताव पर कई सीनेटरों ने अपनी बात रखी। सिमरनजीत सिंह ढिल्लों ने भी डीयूआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रभदीप ने भी कहा कि नॉन-टीचिंग कर्मचारियों की फाइलें अब तक पास न होने पर जांच कमेटी बनाई जाए। वरिष्ठ सीनेटर सत्यपाल जैन ने कहा कि हाउस जो चाहे कर सकता है। पीयू की बेहतरी के लिए निर्णय लिया जा सकता है।
हेल्थ सेंटर की स्थिति दयनीय, बढ़ाने होंगे संसाधन व डॉक्टर
सीनेटर प्रो. प्रशांत गौतम ने कहा कि पीयू के हेल्थ सेंटर की स्थिति ठीक नहीं है, उसके लिए संसाधन बढ़ाने होंगे। चिकित्सकों आदि की तैनाती करनी होगी। यही बात सीनेटर डॉ. निधि गौतम ने कही। यूआईएएमएस विभाग में पीएचडी फिर से शुरू करवाने की मांग उठी। प्रो. प्रशांत गौतम ने कहा कि कॉलेेजों में जांच को जानी वाली कमेटियों को प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि गुणवत्ता में सुधार हो सके। डॉ. जगवंत सिंह ने भी कॉलेजों के मुद्दे उठाए। सीनेटर संदीप सीकरी ने छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान की मांग की। सीनेटर प्रो. जगत भूषण ने कहा कि इसके लिए जल्द पोर्टल बनाने की जरूरत है।
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