मोहाली। स्वयं को इलेक्ट्रानिक्स व सूचना टेक्नोलॉजी मंत्रालय भारत सरकार का प्रोसेसिंग आफिसर बताकर जिला परिषद मोहाली में सरकारी कमरे की मांग करने और फर्जी कागजात बनाकर सरकारी गाड़ी व गनमैन मुहैया करवाने के मामले में एक व्यक्ति को बलौंगी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान चरनप्रीत सिंह निवासी जुझार नगर बलौंगी के रूप में हुई है। आरोपी के खिलाफ अतिरिक्त उपायुक्त की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को बुधवार जिला अदालत में पेश किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार आरोपी को चंडीगढ़ सेक्टर-24 वेस्ट से गिरफ्तार किया गया है।
अतिरिक्त उपायुक्त ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि आरोपी चरनप्रीत सिंह को कॉमन सर्विस सेंटर स्कीम के अधीन निर्धारित शर्तों के तहत जिला को-आर्डीनेटर की ओर से वेरिफाई करने के उपरांत बतौर विलेज लेवल इंटरपिन्योर की आईडी दी गई थी। यह व्यक्ति भारत सरकार की स्कीमों जैसे पेन कार्ड अपडेट, पासपोर्ट सर्विस, कार्ड संबंधी काम करता रहा है। एक्टिव होने के कारण आरोपी जिला स्तर व ब्लॉक स्तर समागमों में तौर वीएलई आता रहा है। इन समागमों में आने के कारण जिला व ब्लॉक स्तर पर काम करते ज्यादातर आफिसर व कर्मचारी उसे पहचानते थे। इस व्यक्ति ने खुद को बतौर प्रोसेसिंग आफिसर इलेक्ट्रानिक्स व सूचना टेक्नोलॉजी मंत्रालय विभाग भारत सरकार बताते हुए 3 जून 2025 को भारत सरकार के लेटर हेड के अधीन उक्त दफ्तर को लिखित पत्र लिखकर जिला परिषद मोहाली में काम करने के लिए जगह मुहैया करवाने के लिए कहा। यह पत्र आरोपी ने डॉ. चरनप्रीत सिंह ढिल्लों प्रोसेसिंग आफिसर आफिसर इलेक्ट्रानिक्स व सूचना टेक्नोलॉजी मंत्रालय विभाग भारत सरकार के पास निजी तौर पर पेश होकर दिया। इस पर कार्रवाई कर आरोपी से सहमति पत्र की मांग की। आरोपी ने बताया कि 23 जून को उसके विभाग ने सहमति पत्र ई-मेल के माध्यम से उन्हें भेज दिया है। जो पत्र अधिकारियों को ई-मेल के माध्यम से मिला उस पर इलेक्ट्रानिक्स व सूचना टेक्नोलॉजी मंत्रालय विभाग भारत सरकार के अधिकारी सोभेदरा बहादर डायरेक्टर परसोनल के हस्ताक्षर थे। विभाग को इस पत्र पर शक हुआ और उक्त विभाग की सरकारी वेबसाइट पर सर्च करने डायरेक्टर सोभेदरा बहादर की ई-मेल हासिल की। उन्हें यह पत्र भेजकर वेरिफाई करवाया गया तो उन्होंने बताया कि यह पत्र फर्जी है। आरोपी से उसके पेन कार्ड , आधार कार्ड व दफ्तर के आई कार्ड की कॉपी मांगी गई तो उसने बताया कि उसकी भर्ती भारत सरकार के स्टॉफ सेलेक्शन कमिशन विभाग की ओर से की गई थी। जब उससे सेलेक्शन कमिशन के पत्र की मांग की तो उसने यह पत्र देने से इंकार कर दिया और अधिकारियों से कहा कि उसके विभाग ने उसकी बदली किसी अन्य जिले में कर दी है इसलिए अब उसे दफ्तरी कमरे की जरूरत नहीं है। जांच में पता चला कि नियुक्ती पत्र व शनाख्ती कार्ड जो फर्जी थे उसने खुद तैयार किए थे। जिसे बाद में मामला दर्ज करने उपरांत गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में यह सामने आया कि आरोपी ने कर्मचारियों से कहा कि उसने यूपीएससी की ओर से ली जाती परीक्षा का पहला पेपर पास कर लिया है। उसने अतिरिक्त उपायुक्त मोहाली के पास पेश होकर कहा कि उसे भारत सरकार की स्कीमों की चैकिंग करनी होती है और गांव में कैंप लगाने होते हैं इसलिए उसे पुलिस मुलाजिम दिए जाएं। वहीं, ब्लॉक विकास व पंचायत आफिसर मोहाली के दफ्तर ने बताया कि यह व्यक्ति अपनी इनोवा गाड़ी पर बत्ती लगाकर आता था और वह बताता था कि उसे यह गाड़ी और ड्राइवर भारत सरकार की ओर से सरकारी तौर पर मुहैया करवाए गए हैं। उसने बताया कि उसने एमबीबीएस एम्स कॉलेज दिल्ली और एमडी गॉयनीकॉलोजी मोहाली से की है। आरोपी जिले उपायुक्त व जिला स्तर पर अन्य अधिकारियों के साथ अपनी फोटो करवाई हुई थी। पुलिस को लिखकर दिया गया है कि वह उन फोटो का गलत इस्तेमाल कर चुका है, जिसकी जांच की जाए।