हरियाणा में हुए निकाय चुनाव में 9279 मतदाताओं को एक भी चेयरमैन का उम्मीदवार पसंद नहीं आया। नगर परिषद और नगर पालिकाओं के चेयरमैन पदों के लिए कुल 406 उम्मीदवार थे लेकिन इन मतदाताओं ने किसी को भी वोट न देकर अपना वोट नोटा को दिया है। सबसे अधिक पलवल नगर परिषद में 853 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया है। सबसे कम नोटा दबाने वाले मतदाता नांगल चौधरी के रहे, यहां केवल 29 वोट नोटा को मिल सके।
परिणाम के मुताबिक जींद नगर परिषद में 599 और भिवानी में 598 वोट नोटा पर पड़े। बहादुरगढ़ में 579, कैथल में 528, नारनौल में 521, कालका में 433, टोहाना में 401, फतेहाबाद में 346, नरवाना में 303 मतदाताओं ने नोटा को वोट दिया। चुनाव आयोग ने ईवीएम में निकाय चुनाव में भी ‘नोटा’ का विकल्प दिया था। ‘नोटा’ को एक ‘काल्पनिक चुनावी उम्मीदवार’ के रूप में समझा गया। प्रदेश में कहीं भी नोटा को उम्मीदवारों से अधिक वोट नहीं मिले।
नियम के अनुसार अगर ‘नोटा’ के वोट सबसे अधिक होते तो नोटा ही निर्वाचित होता और फिर से चुनाव कराया जाता। इसमें पूर्व चुनाव में मैदान में उतरे उम्मीदवारों को मौका नहीं मिलता। नोटा या उम्मीदवार बराबर वैध वोट प्राप्त करते हैं तो ऐसी स्थिति में चुनाव लड़ने वाला उम्मीदवार निर्वाचित घोषित होता। नोटा दोबारा उच्चतम वोट पाता है तो उसके बाद चुनाव नहीं करवाया जाएगा। नोटा के बाद उच्चतम वोट प्राप्त करने वाले उम्मीदवार विजयी घोषित किया जाता है।
| स्थान |
नोटा को मिले वोट |
| चीका |
301 |
| हांसी |
269 |
| डबवाली |
263 |
| सोहना |
209 |
| ऐलनाबाद |
203 |
| गोहाना |
170 |
| सफीदों |
160 |
| समालखा |
158 |
| गन्नौर |
138 |
| होडल |
137 |
| झज्जर |
130 |
| शाहाबाद |
129 |
| भूना |
128 |
| बरवाला |
126 |
| पिहोवा |
120 |
| महेंद्रगढ़ |
115 |
| नारायणगढ़ |
110 |
| रतिया |
105 |
| बावल |
101 |
| चरखी दादरी |
99 |
| घरौंडा |
93 |
| पुन्हाना |
90 |
| असंध |
84 |
| रानिया |
76 |
| तरावड़ी |
74 |
| महम |
70 |
| लाडवा |
67 |
| नूंह |
63 |
| कुंडली |
59 |
| इस्माइलाबाद |
57 |
| फिरोजपुर |
48 |
| उचाना |
47 |
| राजौंद |
46 |
| साढ़ौरा |
44 |
| नांगल चौधरी |
29 |