डॉ. दीपक भसीन ने बताया कि बुजुर्ग महिला दो हफ्ते उनके अस्पताल में रहीं। इलाज की शुरूआत में उन्होंने बुजुर्ग महिला का शुगर कंट्रोल करने से लेकर अन्य दिक्कतों पर काबू किया। इसके बाद इलाज में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। वह अस्पताल में बड़े प्यार से रहीं। उनकी टीम ने दो टेस्ट किए, जो निगेटिव आए। इसके बाद अब सकुशल होकर लौटी थी।
कोरोना के लक्षण भी फ्लू की तरह ही हैं
डॉक्टर ने बताया कि बुजुर्ग महिला के बेटों को भी सेहत विभाग की तरफ से घर में क्वांरटीन करके रखा था। ऐसे में उनकी टीम कुलवंत की उनके बेटों से बात करवा देती थी। ऐसे में हौंसला अफजाई से उनका काम बढ़िया तरीके से चलता रहा।
लॉकडाउन के पीछे ही यह है वजह
डॉक्टर भसीन के मुताबिक, अध्ययन बताता है कि 81 फीसदी लोगों को इस बीमारी से कोई दिक्कत नहीं आती है। केवल चौदह फीसदी लोगों को डॉक्टर की जरूरत पड़ती है। सांस में दिक्कत आती है। जबकि पांच फीसदी को आईसीयू की जरूरत पड़ती है। सबसे खतरनाक बात इसका एक से दूसरे व्यक्ति में फैलना है। जबकि अन्य वायरस में ऐसा नहीं होता है। जिसके चलते लॉकडाउन से लेकर अन्य कदम सरकार उठा रही है।
घर में मास्क लगाकर न रखें, हो जाएगा गला खराब
डॉ भसीन ने कहा कि जो चीजें हम बाहर से लेकर आते हैं। वे आसानी से धुल सकती हैं, उन्हें धोने में कोई दिक्कत नहीं है। जहां तक हो सके कि अपने हाथ जरूर धोने चाहिए। घर में मास्क लगाकर नहीं रहना चाहिए। उससे भी गला खराब होने की भी आशंका रहती है। बाहर जाना है तो ही मास्क पहनें व सामाजिक दूरी बनाकर चलें। हो सके तो मास्क की जगह रुमाल या कपड़े का प्रयोग करें। एक रुमाल दो से तीन दिन नहीं चलाना चाहिए बल्कि इसे रोजाना धोना चाहिए।