मेल में लिखी ऐसी भाषा कि प्रिंसिपल को नहीं हुआ शक
सूत्रों के अनुसार, इस छात्र ने न केवल वाइस प्रिंसिपल की भाषा और अंदाज अपनाया, बल्कि मेल में इतनी सटीकता से शब्दों का चयन किया कि प्रिंसिपल को एक पल के लिए भी शक नहीं हुआ। प्रिंसिपल ने भी विश्वास के चलते बिना कुछ सोचे प्रश्नपत्र भेज दिया। हैरानी तब हुई जब परीक्षा के दिन कक्षा में प्रश्न पत्र पहुंचा ही नहीं। वाइस प्रिंसिपल से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि ऐसी कोई भी मेल उन्होंने की ही नहीं है। इस पर प्रिंसिपल के पैरों तले जमीन खिसक गई।
मेल ट्रैक होने पर पकड़ा गया स्टूडेंट
मामले का खुलासा होने पर स्कूल प्रबंधन ने साइबर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई। साइबर थाने की आईटी सेल ने मेल ट्रैकिंग में पाया कि यह ईमेल छात्र के निजी अकाउंट से भेजा गया था। छात्र इतना शातिर था कि उसने वाइस प्रिंसिपल की मेल से मिलती-जुलती ई-मेल फेक आईडी भी बनाई। इसी फेक आईडी से ईमेल करके छात्र की ओर से प्रिंसिपल से प्रश्नपत्र की मांग की गई। घटना सामने आते ही शिक्षकों के चेहरों पर हैरानी और चिंता दोनों साफ झलक रही थीं।
छात्र को जुवेनाइल कोर्ट भेजा
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ईमेल की तकनीकी जांच की तो पता चला कि स्कूल के ही एक छात्र ने ईमेल की थी। इसके बाद पुलिस ने स्कूल के नाबालिग छात्र को पकड़ लिया। पुलिस ने किशोर को जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे बाल सुधार गृह भेज दिया गया।