चंडीगढ़। हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने आईटी पार्क में बनने वाली एक आवासीय योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत आईटी पार्क में 728 फ्लैट्स का निर्माण होगा। इस योजना में कोई भी व्यक्ति आवेदन कर सकेगा। इसमें टू बीएचके के 252 फ्लैट्स, थ्री बीएचके के 448 और फोर बीएचके के 28 फ्लैट्स शामिल हैं। खास बात यह है कि इस योजना में वन बीएचके के फ्लैट्स नहीं होंगे।
दरअसल, सेक्टर-53 की एक आवासीय योजना में वन बीएचके फ्लैट्स में लोगों ने रुचि नहीं दिखाई थी। इसलिए इस योजना में वन बीएचके फ्लैट नहीं रखे गए हैं। बोर्ड अब इस योजना पर आगे काम करेगा और इस प्रोजेक्ट के प्लान को यूटी की अप्रूवल कमेटी के पास भेजा जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि चंडीगढ़ प्रशासन इस योजना को अगले साल अप्रैल तक लांच कर सकता है। योजना के तहत बोर्ड को आईटी पार्क में दो साइट्स पर 728 फ्लैट्स का निर्माण करवाना है। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर यशपाल गर्ग ने बताया कि उन्होंने बैठक में इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब प्लान अप्रूवल कमेटी के पास मंजूरी के लिए इसे भेजा जाएगा। उसके बाद पर्यावरण क्लीयरेंस के लिए आवेदन किया जाएगा। हाउसिंग बोर्ड के प्लान के मुताबिक, इस योजना में दो बेसमेंट पार्किंग होंगी, जिनमें एक फ्लैट मालिक के लिए दो कारों को पार्क करने की जगह मिलेगी।
थ्री बीएचके फ्लैट्स की कीमत दो करोड़ के आसपास होगी : सूत्र
सूत्रों ने बताया है कि इस योजना में फ्लैट की कीमत काफी महंगी होगी, क्योंकि इलाका वीआईपी है। फ्लैट्स से शिवालिक पहाड़ियों का व्यू दिखेगा। आसपास सारे वीआईपी लोगों के फ्लैट्स होंगे। सबसे बड़ी बात पार्किंग को लेकर यहां कोई दिक्कत नहीं रहने वाली। ऐसे में कीमत भी काफी ज्यादा होगी। सूत्रों का कहना है कि थ्री बीएचके की कीमत करीब दो करोड़ के आसपास रहेगी।
राहत : लोग अपने हिसाब से बनवा सकेंगे मकान
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने शहर भर में स्वतंत्र भवनों में रहने वाले लोगों को राहत दी है। बोर्ड के मुताबिक इन मकानों के लिए एक स्टैंडर्ड ड्राइंग जारी की जाएगी, जिसके तहत इन मकानों में रहने वाले लोग मकान को तोड़कर नए सिरे से निर्माण कर सकेंगे। स्टैंडर्ड ड्राइंग को स्वीकृति मिलने के बाद उसे वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।
अब प्रशासक और उनके सलाहकार नहीं कर सकेंगे मकान आवंटित
शुक्रवार को हाउसिंग बोर्ड की बैठक में एक और निर्णय लिया गया, जिसमें प्रशासन के उस कोटे को खत्म कर दिया गया, जिसके तहत प्रशासक व उनके सलाहकार अपनी तरफ से किसी को भी मकान आवंटित कर सकते थे। सूत्रों ने बताया है कि यह निर्णय बहुत ही सोच-समझकर उठाया गया है। दरअसल, कई लोग सिफारिश करवाकर चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों से मकान आवंटित कराने की गुहार लगाते थे। इससे आला अधिकारी भी परेशान थे।