कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर किसानों ने पिछले 22 दिनों से आंदोलन छेड़ा हुआ है। वहीं सरकार ने अब कृषि कानूनों के समर्थन में अभियान शुरू कर दिया है। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ने लगी है। ऐसे में किसान पिछले कई दिनों से सामान्य चल रहे आंदोलन को दोबारा तेज करने की रणनीति बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
किसान इतने दिनों से ठंड में सड़कों पर बैठे हुए हैं। वह केवल एक ही मांग कर रहे हैं कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। सरकार पूरी तरह से तानाशाही दिखा रही है और वह किसान का दर्द नहीं समझ रही है। अब सरकार ने किसानों की पीड़ा समझने की जगह अपना अभियान शुरू कर दिया है जो पूरी तरह से गलत है। इस तरह के अभियान छेड़ने की जगह सरकार को कृषि कानून रद्द करने पर बातचीत करनी चाहिए। ऐसे ही हालात रहे तो किसानों को आंदोलन तेज करना होगा। - शमशेर सिंह दहिया, राष्ट्रीय महासचिव भाकियू अंबावता
खेती को बचाने के लिए किसान आंदोलन कर रहा है। किसान अपनी मर्जी से ठंड में सड़क पर नहीं है, बल्कि वह केवल सोई हुई सरकार को जगाने के लिए सड़क पर डटा है। इसके बाद भी सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। किसान आंदोलन के समर्थन में जिस तरह से बाबा राम सिंह ने अपनी जान दी। वह हर किसी के लिए बहुत बड़ी बात है और सरकार का रवैया देखकर किसान परेशान हो रहा है। सरकार को जल्द ही कृषि कानून रद्द करने पर कोई फैसला लेना होगा और ऐसा नहीं होता है तो आंदोलन बढ़ाया जाएगा। - राजेंद्र आर्य दादूपुर, अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर नौजवान यूनियन
सरकार अब किसी भी तरह से आंदोलन को कमजोर करने में लगी हुई है और इसलिए ही अपने अभियान चला रही है। कभी वह फर्जी संगठनों के साथ बैठक करती है तो कभी अपने नेताओं से सभाएं कराती है। इस तरह से किसान कमजोर नहीं होने वाला है और कृषि कानूनों को रद्द कराकर ही किसान पीछे हटेगा। सरकार को जल्द कोई कदम उठाना चाहिए, जिससे किसानों की खेती बच सके। - हरेंद्र सिंह लखोवाल, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा