मेयर ने व्यापारी, गांव, कर्मचारी, प्रशासनिक व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार के मुद्दे गृहमंत्री के सामने रखे। शहर में समय के अनुसार मकानों में बदलाव का मुद्दा उठाते हुए मेयर ने कहा कि जनसंख्या बढ़ने के साथ लोगों ने अपने घरों में कुछ बदलाव किए हैं, वहीं कुछ लोग बदलाव करना चाहते हैं लेकिन नियमों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा। दि
चंडीगढ़ की मेयर सरबजीत कौर, सीनियर डिप्टी मेयर दलीप शर्मा और डिप्टी मेयर अनूप गुप्ता ने गुरुवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान मेयर ने शहर के छह प्रमुख बिंदुओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शहर की 70 प्रतिशत आबादी लाल डोरे के बाहर है इसलिए उसे नियमित किया जाए। लोग वोट देने के बाद हमसे मूलभूत सुविधाओं की उम्मीद रखते हैं लेकिन हम उन्हें सुविधा देने में असहज महसूस कर रहे हैं। गृहमंत्री ने मेयर को आश्वासन दिया कि इस संबंध में जल्द कोई अच्छी खबर मिलेगी।
विज्ञापन
मेयर ने बताया कि उन्होंने व्यापारी, गांव, कर्मचारी, प्रशासनिक व्यवस्था और युवाओं के लिए रोजगार के मुद्दे गृहमंत्री के सामने रखे। शहर में समय के अनुसार मकानों में बदलाव का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जनसंख्या बढ़ने के साथ लोगों ने अपने घरों में कुछ बदलाव किए हैं, वहीं कुछ लोग बदलाव करना चाहते हैं लेकिन नियमों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा। दिल्ली की तर्ज पर चंडीगढ़ में भी इस व्यवस्था को मंजूरी दे दी जाए। शहर में कोरोना काल में समाप्त हुए 1691 पदों को फिर से प्रवर्तित करने और 2096 नए पद सृजित करने की अपील की ताकि युवाओं को मौका मिल सके। मेयर ने कहा कि चंडीगढ़ को चतुर्थ दिल्ली हाईकमीशन की रिपोर्ट के अनुसार फंड दिया जाए, जिससे नगर निगम को विकास कार्यों के लिए अधिक रुपया मिल सके।
40 की उम्र के बाद डरते हैं आउटसोर्स कर्मचारी, बनाएं पॉलिसी
मेयर ने गृहमंत्री को बताया कि शहर में आउटसोर्स पर लगे कर्मचारी 40 वर्ष की उम्र के बाद डरते हैं कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया तो वह क्या करेंगे। इस संबंध में कोई पॉलिसी बनाई जाए। कर्मचारियों को सरकारी मानकों के अनुसार रिटायर न होने तक नौकरी से न निकाला जाए। नई नियमित भर्तियां निकलें तो इन्हें प्राथमिकता दी जाए ताकि कर्मचारी अपनी नौकरी को लेकर आश्वस्त हो सकें।
चंडीगढ़ में बनाया जाए आईआईटी
मेयर ने शिक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चंडीगढ़ में वर्ष 1950 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज बना था। इस प्रतिष्ठित संस्थान ने न जाने कितने होनहार छात्रों को देश व समाजसेवा के लिए तैयार किया। अब बदलती शिक्षा व्यवस्था के साथ शहर में एक आईआईटी की भी जरूरत है ताकि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में शहर को और बढ़ावा मिल सके और उत्तर भारत के युवाओं को बेहतर मौका मिल सके।