चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर से मंगलवार को सीनेट बैठक आयोजित की गई। इसमें सत्र 2022-23 के लिए विभिन्न कोर्स में फीस बढ़ोतरी के एजेंडे को पास किया गया है। पीयू के सेल्फ फाइनेंस कोर्स की फीस में 7.5 प्रतिशत तक और अधिकतम 7500 रुपये फीस बढ़ोतरी, ट्रेडिशनल कोर्स की फीस में 500 रुपये की बढ़त और पीयू के एफिलिएटेड कॉलेजों में 10 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी की गई है।
इसके अलावा पीयू के परीक्षा शुल्क में अधिकतम हजार रुपये और न्यूनतम 200 रुपये की फीस बढ़ोतरी की गई है। फीस बढ़ोतरी से एससी/एसटी और ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के छात्रों को बाहर रखा गया है। फीस बढ़ोतरी के फैसले का बैठक में कई सीनेटरों ने विरोध किया और कहा कि ऐसे मामलों में छात्र संगठनों के साथ अधिकारियों की बैठक होनी चाहिए। वहीं, सभी छात्र संगठनों ने भी सीनेट में पास हुए फीस बढ़ोतरी के फैसले का विरोध किया है।
पीयू में ग्रामीण क्षेत्र के छात्र अधिक, फीस बढ़ोतरी पर किया जाए विचार
सीनेटर संदीप ने कहा पीयू की ओर से कॉलेजों में 10 प्रतिशत फीस की बढ़ोतरी बहुत अधिक है। इस पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए क्योंकि पीयू में अधिकतर छात्र ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं। हर किसी के अभिभावक सरकारी नौकरी नहीं करते हैं। छात्र इतनी अधिक फीस का खर्च वहन नहीं कर पाएंगे। सीनेटर सिमरनजीत सिंह और रविंदर धालीवाल ने कहा कि पीयू को फीस बढ़ोतरी की कमेटी में छात्र संगठनों को शामिल करना चाहिए था। पीयू फीस में अधिक बढ़ोतरी कर रही है। इसमें कटौती की जानी चाहिए। सीनेटर आरएस झांझी ने कहा कि कोरोना महामारी के दौर में छात्रों के ड्रॉप आउट रेट में बढ़ोतरी आई है ऐसे में यूनिवर्सिटी फीस बढ़ाकर छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। इस मामले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। अधिकतम पांच प्रतिशत तक फीस बढ़ाई जाए। सीनेटर आईएस सिद्धू ने कहा कि छात्रों को परीक्षा कार्यालय में काम करवाने में दिक्कतें आती हैं। फीस बढ़ाई जा रही है तो परीक्षा ब्रांच के कंप्यूटर भी बदले जाएं।
कोट्स...
कोरोना के बाद फीस बढ़ोतरी से छात्रों पर पड़ेगा बोझ
कोरोना महामारी के समय में पीयू की ओर से छात्रों की फीस में छूट नहीं दी गई थी। अब यूनिवर्सिटी खुलते ही छात्रों की फीस में बढ़ोतरी से पीयू विद्यार्थियों पर आर्थिक बोझ को बढ़ा रही है। इस फैसले पर पुर्नविचार किया जाना चाहिए। -पुनित मसितां, इनसो
फीस बढ़ाकर निजी यूनिवर्सिटी की ओर हो रहे अग्रसर
पंजाब यूनिवर्सिटी हर कोर्स के साथ परीक्षा शुल्क में फीसें बढ़ाकर सरकारी संस्थान को निजी यूनिवर्सिटी की ओर अग्रसर कर रहे हैं। पीयू में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र बहुत अधिक आते हैं। ऐसे फैसले लेकर पीयू उच्च शिक्षा से छात्रों को वंचित कर रही है। -जोध सिंह, सथ
शिक्षा महंगी कर छात्रों को कर रहे शिक्षा के हक से वंचित
पहले ही महंगाई और बेरोजगारी बढ़ रही है। अब सरकारी यूनिवर्सिटियों में भी फीसों को बढ़ाकर शिक्षा महंगी कर ग्रामीण और मध्यम व निम्न वर्गीय छात्रों से शिक्षा का हक छीना जा रहा है। पीयू में फीस बढ़ोतरी पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। - संदीप, एसएफएस