इसका पूरा खुलासा वह 22 अक्तूबर को करेंगे। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल तो शरीफ इंसान हैं और उनका सियासत से कोई सरोकार नहीं है लेकिन अकाली दल सुप्रीमो इस धार्मिक आयोजन में सियासत ले आए हैं। जिसके परिणाम अब हम सबके सामने हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह टेंडर दस दिन पहले ही दे दिया गया था जिससे साफ है कि एसजीपीसी सांझी स्टेज करना ही नहीं चाहती थी।
एसजीपीसी ओर से तैनात समागम इंचार्ज बीबी जागीर कौर ने आरोप लगाया कि एसजीपीसी पंजाब सरकार की ओर से सांझी स्टेज को लेकर सकारात्मक जवाब का इंतजार करती रही है। अब तक एसजीपीसी की तालमेल कमेटी की मीटिंग में आने वाले पंजाब सरकार के नेता मुख्यमंत्री से पूछकर बताने की बात कहते रहे, लेकिन किसी ने अभी तक सही जवाब नहीं दिया।
अब संगत के लिए एसजीपीसी ने तो अपनी ड्यूटी निभानी ही है। इसलिए एसजीपीसी की ओर से दिल्ली की कंपनी को स्टेज बनाने के लिए 10 करोड़ रुपये में टेंडर दिया गया है। उन्होंने बताया कि दो दिन तक एसजीपीसी की स्टेज बनाने का काम गुरु नानक स्टेडियम में शुरू हो जाएगा।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने कहा कि वह कभी पंजाब सरकार की स्टेज पर आने के लिए सहमत नहीं थे। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी तो हमेशा शताब्दी समारोह पर धार्मिक स्टेज बनाती आई है और अब भी बना रही है। पंजाब सरकार खुद अलग स्टेज बना रही है। इसलिए पंजाब सरकार को इस स्टेज पर आकर सांझे तौर पर कार्यक्रम मिलजुल कर मनाने चाहिए थे, लेकिन पंजाब सरकार तो जिद पर अड़ी हुई है।
पंजाब सरकार के साथ तालमेल कमेटी में इसके लिए बैठकें की जा रही थी, लेकिन वह तो इस पर राजी नहीं हुए और अपनी अलग स्टेज बना ली। जब उनसे बाबा नानक के सर्व सांझीवालता के संदेश के अमल के बारे में पूछा गया तो वह बोले कि वह तो अब भी तैयार हैं, लेकिन पंजाब सरकार जिद कर रही है।
कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर रंधावा की ओर से दिल्ली के किसी अकाली नेता को टेंडर दिए जाने के बयान पर एसजीपीसी प्रधान ने कहा कि रंधावा तो इसी नीति से आते थे कि स्टेज अलग ही बने। टेंडर पारदर्शी ढंग से दिया गया है। किसी व्यक्ति विशेष को सुविधा नहीं दी गई है। यह आरोप गलत है। इसके लिए एसजीपीसी की ओर से गठित मानक के अनुरूप 10 सदस्यों की ओर से स्क्रूटनी करने के बाद ही टेंडर दिया गया है।
दिल्ली की फर्म पवेलियन फर्नीशर्स के मालिक कर्म बेदी ने एसजीपीसी की ओर से टेंडर मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि 18 अक्तूबर तक सामान पहुंच जाएगा और पांच नवंबर तक स्टेज तैयार करके एसजीपीसी के सुपुर्द कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी ने तीन दिन के लिए स्टेज बनवाना है, जहां पर नौ से 12 नवंबर तक धार्मिक कार्यक्रम होंगे।
कैबिनेट मंत्री रंधावा ने उठाया सवाल, ठेका लेने वाली कंपनी अकाली नेता की तो नहीं
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से सुल्तानपुर लोधी में होने वाले समागम के प्रबंधों का ठेका दिल्ली की एक कंपनी को 10 करोड़ रुपये में देने पर पंजाब कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि कमेटी ने दिल्ली की जिस कंपनी को ठेका दिया है, वह किसी अकाली नेता की भी हो सकती है।
इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी बादल परिवार को प्रमोट करने के लिए अपनी स्टेज अलग लगा रही है, यह ठीक नहीं है। उनका आरोप है कि शिरोमणि कमेटी बादलों के कहने पर ऐसा कर रही है। पंजाब सरकार ने कमेटी के साथ साझा प्रोग्राम करवाने की पूरी कोशिश की, मगर कमेटी अकाली दल के कहने पर चल रही है। इसी वजह से समागम का ठेका भी दिल्ली की एक कंपनी को दिया गया है।
550वें प्रकाश पर्व के आयोजन को लेकर एसजीपीसी और पंजाब सरकार के बीच गठित तालमेल कमेटी का अस्तित्व लगभग खत्म हो गया है। अब सुल्तानपुर लोधी में गुरुद्वारा बेर साहिब में आयोजित कार्यक्रम में मंच की सरदारी को लेकर वैचारिक मतभेद पैदा हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार पंजाब सरकार सुल्तानपुर लोधी में गुरुद्वारा बेर साहिब में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य मंच के संचालन के साथ-साथ प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति सहित दूसरे राज्यों से आने वाले मुख्यमंत्रियों व कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी सहित दिग्गज नेताओं को कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथों सम्मानित करवाना चाहती है।
साथ ही मंच के संचालन की जिम्मेदारी एक मंत्री को सौंपना चाहती थी। एसजीपीसी खुद मंच के संचालन के साथ-साथ सभी राजनीतिक हस्तियों और धार्मिक नेताओं को बादल परिवार से सम्मानित करवाना चाहती है। यही कारण है कि एसजीपीसी व पंजाब सरकार के बीच तालमेल नहीं बन सका है।
एसजीपीसी और पंजाब सरकार के बीच मतभेद उस समय और गहरा गए थे जब एसजीपीसी अध्यक्ष भाई गोबिंद सिंह लौंगोवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुख्य कार्यक्रम में न्योता देते समय तालमेल कमेटी में शामिल पंजाब सरकार के प्रतिनिधियों मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत सिंह चन्नी को पूरी तरह नजरंदाज कर दिया था।
मंत्री रंधावा ने इसका डट कर विरोध किया था। रंधावा ने भाई लौंगोवाल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए श्री अकाल तख्त के जत्थेदार हरजीत सिंह को पत्र भी लिखा था हालांकि उन्हें इसका जवाब नहीं मिला था। एसजीपीसी द्वारा बुलाई गई तालमेल कमेटी की दो बैठकों में पंजाब सरकार के प्रतिनिधि शामिल नहीं हुए। इस संबंध में भाई लौंगोवाल ने मुख्यमंत्री को तालमेल कमेटी में शामिल होने के लिए सरकारी प्रतिनिधि भेजने के लिए दो पत्र भी लिखे लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इन पत्रों का जवाब नहीं दिया।
मतभेद दूर नहीं कर पाया श्री अकाल तख्त साहिब
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने तालमेल कमेटी के गठन के समय एसजीपीसी व पंजाब सरकार के बीच काम का बंटवारा कर दिया था। जत्थेदार ने आदेश दिए थे कि पंजाब सरकार गुरुद्वारा साहिबान के बाहर के प्रबंध देखेगी, एसजीपीसी गुरुद्वारा साहिब के भीतर आयोजित कार्यक्रमों के प्रबंध देखेगी।
इस कार्यक्रम को पंजाब सरकार ने स्वीकार नहीं किया। सरकार को इससे यह संदेश गया कि मुख्य कार्यक्रम की सारी ताकत एसजीपीसी को सौंप दी गई है। जत्थेदार ने तालमेल कमेटी का गठन तो किया लेकिन तालमेल कमेटी के बीच तालमेल पैदा करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए। हालांकि कुछ दिन पहले उन्होंने कहा था कि यदि सरकार और एसजीपीसी के बीच तालमेल नहीं हुआ तो श्री अकाल तख्त इसमें दखल देगा।