श्री गुरु नानक देव जी के 550वें पर्व पर गुरुघर में ‘पवन’ गुरुबाणी में दर्ज चंदन-गुलमोहर की खुशबू से संगत को सराबोर करेगी। एतिहासिक गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में नतमस्तक होने आने वाली संगत का सबसे पहले दर्शनीय द्योढ़ी से दरबार साहिब तक चंदन-गुलमोहर के पौधे स्वागत करेंगे। इससे श्री गुरु नानक देव जी के सदियों पहले पर्यावरण संरक्षण के धार्मिक महत्ता वाले ‘पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत्त’ का पैगाम साकार होता दिखेगा।
यहीं नहीं, पूरे गुरुद्वारा परिसर को हरियाली से ओतप्रोत किया जा रहा है। जहां पर देसी के साथ-साथ विदेशी पौधे भी गुरु घर की आभा को बढ़ाते दिखाई देंगे। गुरुद्वारा श्री बेर साहिब में इस समय नई दर्शनीय द्योढ़ी का निर्माण कार्य एसजीपीसी की ओर से युद्ध स्तर पर करवाया जा रहा है। यह दर्शनीय द्योढ़ी हूबहू अमृतसर के श्री हरिमंदिर साहिब की तरह होगी। दर्शनीय द्योढ़ी से दरबार साहिब तक जाने वाले रास्ते के दोनों ओर चंदन-गुलमोहर के आठ पौधे स्थापित किए जाएंगे, जिनका उल्लेख गुरुबाणी में भी मिलता है।
अब एसजीपीसी की ओर से गुरबाणी का अनुसरण करते हुए यहां पर विरासती पौधे लगाकर सिख संगत को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ-साथ सूबे को हरा-भरा बनाने के लिए ज्यादा तादाद में पौधे रोपे जाने का संदेश देने की कोशिश की जा रही है। जिससे गुरु साहिब के आशय को अमली रूप दिया जा सके। एतिहासिक गुरुद्वारा परिसर में हर जगह हरियाली ही हरियाली नजर आएगी। ऐसे-ऐसे पौधे गमलों और जमीन में रोपे जा रहे हैं, जिनसे गुरुद्वारा परिसर में खुशबू हमेशा महकती रहे।
एतिहासिक गुरुद्वारा श्री बेर साहिब के मैनेजर सतनाम सिंह रियाड़ बताते हैं कि गुरुद्वारा परिसर में नया लंगर हाल, कार्यालय, दर्शनीय द्योढ़ी, 3 कार पार्किंग का कार्य तेजी से चल रहा है। यह 25 अक्टूबर तक मुकम्मल हो जाएंगे। बाबा सेवा सिंह खडूर साहिब वालों को चंदन-गुलमोहर के पौधे लगाने की सेवा सौंपी गई है। निर्माण मुकम्मल होते ही इन पौधे से गुरु घर महकने लगेगा। इसके अलावा पूरे गुरुद्वारा परिसर में फूल वाले पौधे लगाए जाएंगे।