युवतियों से छेड़छाड़ के मामले में अमेरिकी यूनिवर्सिटी और पीजीआई की रिसर्च में चौंकाने वाला सच सामने आया है। स्टडी के मुताबिक 15-24 आयु वर्ग की 30 से 50 प्रतिशत लड़कियों को छेड़खानी के संताप से गुजरना पड़ रहा है।
यही नहीं, जब उन्होंने इसकी शिकायत अपने परिजनों से की तो उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया और बेइज्जत कर घर में कैद कर दिया। स्कूल और वर्क प्लेस जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। इतनी बेड़ियां डालने से सुसाइड करने की प्रवृत्ति तीन गुनी बढ़ जाती है। यह स्टडी हाल ही में पंजाब के 19 गांवों की 198 युवतियों पर की गई है।
युवतियों ने बताया कि छेड़खानी की ये घटनाएं उनके साथ पिछले एक साल के भीतर हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ बचपन में भी छेड़खानी की गई थी। इस स्टडी का मकसद छेड़खानी के बाद युवतियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे असर को जानना था।
स्टडी में पता चला कि ऐसी घटनाओं से युवतियों के दिमाग पर काफी असर पड़ता है। उनके मन में सुसाइड करने का विचार तीन गुना बढ़ जाता है, जो घातक है। स्टडी में पीजीआई की ओर से डा. मनमीत कौर व यूएसए की उताह यूनिवर्सिटी की ओर से शेरोन टालब्वायज ने सहयोग किया। स्टडी में मेहर बाबा चैरिटेबिल ट्रस्ट की ओर से भी मदद की गई।