फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रिसर्च में युवतियों से छेड़छाड़ पर चौंकाने वाला खुलासा

Wed, 12 Aug 2015 03:15 PM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
युवतियों से छेड़छाड़ के मामले में अमेरिकी यूनिवर्सिटी और पीजीआई की रिसर्च में चौंकाने वाला सच सामने आया है। स्टडी के मुताबिक 15-24 आयु वर्ग की 30 से 50 प्रतिशत लड़कियों को छेड़खानी के संताप से गुजरना पड़ रहा है।
विज्ञापन


यही नहीं, जब उन्होंने इसकी शिकायत अपने परिजनों से की तो उन्हें ही जिम्मेदार ठहराया और बेइज्जत कर घर में कैद कर दिया। स्कूल और वर्क प्लेस जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। इतनी बेड़ियां डालने से सुसाइड करने की प्रवृत्ति तीन गुनी बढ़ जाती है। यह स्टडी हाल ही में पंजाब के 19 गांवों की 198 युवतियों पर की गई है।

युवतियों ने बताया कि छेड़खानी की ये घटनाएं उनके साथ पिछले एक साल के भीतर हुई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ बचपन में भी छेड़खानी की गई थी। इस स्टडी का मकसद छेड़खानी के बाद युवतियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे असर को जानना था।
विज्ञापन


स्टडी में पता चला कि ऐसी घटनाओं से युवतियों के दिमाग पर काफी असर पड़ता है। उनके मन में सुसाइड करने का विचार तीन गुना बढ़ जाता है, जो घातक है। स्टडी में पीजीआई की ओर से डा. मनमीत कौर व यूएसए की उताह यूनिवर्सिटी की ओर से शेरोन टालब्वायज ने सहयोग किया। स्टडी में मेहर बाबा चैरिटेबिल ट्रस्ट की ओर से भी मदद की गई।
विज्ञापन

य‌ुवतियों के प्रति बदल जाता घर पर बर्ताव 

स्टडी के दौरान पता चला कि गांवों में स्थिति काफी खराब है। युवतियों ने बताया कि आरोपी उन्हें घूरते हैं। भद्दे-भद्दे कमेंट करते हैं। उनके शरीर को छूते हैं। युवतियों ने बताया कि जब वे इसकी शिकायत करती हैं तो उन पर प्रतिबंध लगा दिए जाते हैं। घर से बाहर जाने पर रोक लग जाती है। फेमिली में दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।

यह पड़ता है प्रभाव
युवतियों ने बताया कि छेड़खानी और उसकी शिकायत करने के बाद उन पर भावनात्मक प्रभाव भी पड़ता है। 88 प्रतिशत युवतियों में डर, 78 प्रतिशत युवतियों में खीझ और 68 प्रतिशत युवतियों में शर्मिंदगी की भावना उत्पन्न हो जाती है।

आधे से ज्यादा प्रतिभागियों ने बताया कि उनके साथ बचपन में भी यौन शोषण हुआ है। युवतियों में मेंटल डिसआर्डर भी बढ़ता है। कुंठा, डिप्रेशन और सुसाइड की प्रवृत्ति तीन गुना तक बढ़ जाती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें