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चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था के हालात: 50 पीसीआर और 15 बाइक सुरक्षा के लिए रात में तैनात, फिर भी हर दूसरे दिन वारदात

Mon, 09 May 2022 01:09 PM IST
निवेदिता वर्मा संदीप खत्री, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

पीसीआर पर 24 घंटे में 8-8 घंटे की शिफ्ट में कर्मचारियों की तैनाती होती है। वहीं 15 चीता बाइक रात को गश्त के लिए लगती हैं। इसमें पीसीआर चालक और थाने से एक पुलिसकर्मी होता है।
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पंचकूला और मनीमाजरा सीमा पर कोई सिक्योरिटी नहीं। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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15 किलोमीटर के चंडीगढ़ शहर में रात के समय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पुलिस की 50 पीसीआर और 15 बाइक गश्त करतीं हैं लेकिन अपराध पर अंकुश लगाना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। अपराध को रोकने में न पुलिस के नाके काम आ रहे हैं और न हाईटेक कैमरे। स्थिति यह है कि अब वीआईपी सेक्टरों में भी खुलेआम वारदात हो रहीं हैं और आरोपी महीनों तक नहीं पकड़े जा रहे हैं। रात के समय शहर में लूट और मारपीट की घटनाएं आम हो गईं हैं। जनता की सुरक्षा को लेकर यूटी पुलिस कितनी अलर्ट है इसके लिए अमर उजाला टीम ने शनिवार रात 12 बजे के बाद निरीक्षण किया। इस दौरान केवल पंजाब और हरियाणा के राजभवन के बाहर पुलिस चौकस दिखी। 

डीजल की तय है सीमा, कैसे अपराध पर लगेगा अंकुश

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीसीआर में डीजल डलवाने की सीमा तय है। इस कारण पूरी रात गश्त करना संभव नहीं होता है। पीसीआर कुछ क्षेत्रों में गश्त करके एक चिह्नित जगह पर खड़ी हो जाती है। पीसीआर की एक गाड़ी को प्रति महीने 250 लीटर डीजल मिलता है। इसमें 24 घंटे काम चलाना पड़ता है। थाने के कामों में भी पीसीआर का उपयोग किया जाता है।

लंबी चौड़ी फौज, फिर भी परिणाम संतोषजनक नहीं

पीसीआर पर 24 घंटे में 8-8 घंटे की शिफ्ट में कर्मचारियों की तैनाती होती है। वहीं 15 चीता बाइक रात को गश्त के लिए लगती हैं। इसमें पीसीआर चालक और थाने से एक पुलिसकर्मी होता है। सभी शिफ्टों में एक उपनिरीक्षक या निरीक्षक को चेकिंग अफसर के तौर पर लगाया जाता है। पीसीआर की मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जाती है। इतनी बड़ी व्यवस्था के बावजूद अपराध पर लगाम नहीं लग पा रहा है।

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स्थान- मोहाली से चंडीगढ़ मार्ग
समय- 12:12 बजे
सीमाओं पर न नाका था न पुलिसकर्मी। फर्नीचर मार्केट स्थित मोहाली और चंडीगढ़ की सीमा पर भी कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखा।

स्थान- पलसोरा बैरियर
समय- टीम 12:15
यहां भी कोई पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था।

स्थान- सेक्टर-42/53 डिवाइडिंग रोड
समय-12:20 मिनट
इस रोड पर कोई नाका और पीसीआर नहीं दिखी। जबकि यहां जंगलों में एक युवती के साथ गैंगरेप की घटना हो चुकी है। बस स्टैंड के बाहर लोगों की भीड़ थी लेकिन पीछे की सड़क सुनसान थी और लाइटें बंद पड़ी थीं।

स्थान- सेक्टर-40/41 से होते हुए सेक्टर-43 तक
समय- रात 12: 30 बजे
जिला अदालत के बाहर कोई पुलिसकर्मी और पीसीआर नहीं दिखाई दी। सेक्टर-39 थाने से होते हुए मलोया की तरफ जाने वाली सड़क सुनसान थी। यहां कई वारदात हो चुकी हैं।
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स्थान- मलोया बस स्टैंड
समय- 12:36 बजे
यहां नाइट इंस्पेक्टर चिरंजी लाल वाहन चालकों को रोककर पूछताछ कर रहे थे। यहां दो पीसीआर भी थीं। लेकिन सेक्टर-25 और श्मशान घाट रोड सुनसान पड़ी थी। यह भी संवेदनशील एरिया है। सेक्टर-25 स्थित जुवेनाइल होम की सड़क भी सुनसान थी।

स्थान- पीयू के पीछे जंगलों में
समय- 12;46
इस सड़क पर न तो पीसीआर दिखाई दी और न कोई नाका लगा था। जबकि यहां कई बार वारदात हो चुकी है। इसके बाद टीम पीजीआई सड़क पर पहुंची। यहां पीजीआई के बाहर पीसीआर खड़ी थी। सेक्टर-17/18 डिवाइडिंग रोड पर सेक्टर-17 थाना पुलिस ने नाका लगाया था।

स्थान- ट्रांसपोर्ट लाइट प्वाइंट
समय- रात 2.30 बजे
यहां भी कोई पुलिसकर्मी नहीं था। जबकि पिछले कुछ ही दिनों में चार से पांच वारदात यहां हो चुकी हैं।

पुलिस का मानवीय रूप भी दिखा
टीम रात 1 बजकर 8 मिनट पर सेक्टर-17 चौक पर पहुंची। यहां पीसीआर रुकी थी। पता चला कि पीसीआर ड्राइवर राकेश एक दृष्टिहीन व्यक्ति को ऑटो में बैठा रहे थे। इसके बाद टीम सेक्टर-22 से होते हुए मनीमाजरा और पंचकूला की सीमा तक पहुंची लेकिन बॉर्डर एरिया पर कोई नाका और पुलिसकर्मी नहीं दिखाई दिया।
 

आठ-आठ घंटों की शिफ्ट में पीसीआर 24 घंटे गश्त करती है। पीसीआर को क्राइम स्पॉट पर भी खड़ा किया जाता है ताकि वारदात होने पर तत्काल पहुंच सकें। लगभग 50

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गाड़ियां रात में गश्त करती हैं। कोई घटना हो जाए तो पीसीआर को वहां भेजा जाता है। - दिलबाग सिंह, डीएसपी पीसीआर

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