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50 लाख रिश्वत मामला: डीएसपी अमरोज को बड़ी राहत, सीबीआई की याचिका खारिज

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चंडीगढ़। 50 लाख रुपये रिश्वत मामले में पंजाब पुलिस के डीएसपी अमरोज सिंह को सीबीआई की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सीबीआई की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें पंजाब सरकार को डीएसपी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन) पर जल्द निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी। अदालत ने साफ किया कि किसी लोक सेवक के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देना या न देना पूरी तरह सरकार का विशेषाधिकार है और न्यायालय इस संबंध में कोई आदेश जारी नहीं कर सकता।
मामला अप्रैल 2021 का है। अंबाला स्थित एक फैंटेसी गेमिंग कंपनी के निदेशक मोहित शर्मा की शिकायत पर सीबीआई ने केस दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार जीरकपुर पुलिस ने कंपनी के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे और कार्रवाई न करने के बदले 50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। सीबीआई ने ट्रैप बिछाकर जींद निवासी अनिल मोर को 10 लाख रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। जांच में डीएसपी अमरोज सिंह और उनके रीडर मंदीप सिंह की कथित भूमिका सामने आने पर दोनों को भी गिरफ्तार किया गया था।
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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन स्वीकृति देना सरकार का अधिकार है। वकील ने यह भी कहा कि सरकार पहले ही डीएसपी के खिलाफ मंजूरी देने से इन्कार कर चुकी है और सीबीआई ने यह तथ्य अदालत से छिपाया। वहीं सीबीआई का कहना था कि दिसंबर 2022 में पंजाब सरकार को पूरा रिकॉर्ड भेज दिया गया था। रीडर मंदीप सिंह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन डीएसपी के मामले में तीन वर्ष बाद भी सरकार ने कोई निर्णय नहीं लिया।
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विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अभियोजन स्वीकृति पर फैसला लेना कार्यपालिका का अधिकार है। ऐसे मामलों में अदालत सरकार को किसी निश्चित समय सीमा में निर्णय लेने का निर्देश नहीं दे सकती। इसी आधार पर सीबीआई की याचिका खारिज कर दी गई। इससे फिलहाल डीएसपी अमरोज सिंह को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है।
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