यह बेक्टीरिया की अपने लिए जरूरी प्रोटीन बनाने की क्षमता को नष्ट करता है। इस जरूरी प्रोटीन के बिना बेक्टीरिया का बढ़ना रुक जाता है और बचे बेक्टीरिया को शरीर का इम्यूनसिस्टम नष्ट कर देता है। यह छाती और आंखों के इन्फेक्शन तथा न्यूमोनिया के इलाज में उपयोगी।
साइड इफेक्ट : अगर ऐसा चिकन खाओगे जिसमें ऑक्सी-टेट्रासाइक्लिन की अनावश्यक खुराक हो तो केलशियम रिच ऑर्गन जैसे दांतों और हड्डियों को नुकसान पहुंचेगा। गर्भवती और दूध पिलाने वाली माताओं के लिए भी यह नुकासानदेह है।
क्लोर-टेट्रासाइक्लिन
यह टेट्रासाइक्लिन ग्रुप का सबसे पहले खोजा गया एंटीबायोटिक है। इसका इस्तेमाल जानवरों पर होता है। बिल्लियों के कंजक्टिवाइटिस में यह उपयोगी है।
साइड इफेक्ट: अगर ऐसा चिकन खाओगे जिसमें क्लोर-टेट्रासाइक्लिन की अनावश्यक खुराक हो तो दांतों पर धब्बे, लीवर डेमेज, वोमिटिंग और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है।
डॉक्सीसाइक्लिन
यह भी टेट्रासाइक्लिन ग्रुप का एंटीबायोटिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इसे बेसिक हेल्थ की सबसे महत्त्वपूर्ण दवा मानता है। यह लाइम डिजीज, प्रोस्टेटाइटिस, साइनोसाइटिस के उपचार में काम आती है।
साइड इफेक्ट : अगर ऐसा चिकन खाओगे जिसमें डॉक्सीसाइक्लिन की अनावश्यक खुराक हो तो सूरज की रोशनी पर शरीर पर लाल चकत्ते हो सकते हैं। हार्मोनल संतुलन हो सकता है। डेयरी उत्पाद के साथ लेने पर विपरीत प्रभाव दिख सकते हैं।
एनफ्लोक्सासिन
अमेरिका में पालतु जानवरों के इलाज में इस एंटीबायोटिक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। यह बेक्टीरिया को सीधे खत्म कर देता है। पोल्ट्री उद्योग में इसका इस्तेमाल होता है।
साइड इफेक्ट : इसकी ज्यादा मात्रा शरीर में जाने पर टॉक्सिक प्रभाव पैदा कर सकती है। उल्टी आदि हो सकती है।
सिप्रोफ्लोक्सासिन
यह फ्लोरोकुइनोलोन्स ग्रुप का एंटीबायोटिक है। शरीर से बेक्टीरिया को खत्म करता है। एंथ्रेक्स के संपर्क में आने वालों को भी यही दिया जाता है।
साइड इफेक्ट्स : इसकी अनावश्यक खुराक से कई तरह की एलर्जी, नसों में सूजन, उन्हें स्थाई क्षति पहुंचा सकती है। अचानक दर्द की शिकायत हो सकती है। सुस्ती, सीने और सिर में दर्द हो सकता है। खूनी दस्त लग सकते हैं।
चिकन से जुड़े तथ्य
- सीएसई ने अपने सर्वे के लिए एनसीआर से चिकन्स के सत्तर सैंपल लिए थे। इसमें चिकन के मसल, लिवर और किडनी में एंटीबायोटिक की उपस्थिति की जांच की गई।
- अमेरिका में पोल्ट्री उद्योग हर साल डेढ़ अरब से पौने दो अरब रुपये की एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल करता है। हालांकि यूरोप और कनाडा में पोल्ट्री उद्योग में इनका इस्तेमाल प्रतिबंधित है।
- एक अनुमान के अनुसार पोल्ट्री उद्योग भारत में हर साल 40 हजार करोड़ का कारोबार करता है और 24 अरब मुर्ग परोसे जाते हैं।