अभी तक हरियाणा में 459 स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन सरकार का दावा है कि ये मामले गत वर्ष की तुलना में कम है। सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि राज्य में 10 अक्तूबर तक 4 लाख एक हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की कटाई हो चुकी है। इसमें से केवल 735 हेक्टेयर क्षेत्र में 459 स्थानों पर पराली जलाए जाने के मामले प्रकाश में आए हैं। यह कुल क्षेत्र का एक प्रतिशत से भी कम है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में राज्य की विभिन्न मंडियों में अब तक 20 लाख टन धान की आवक हुई है। उन्होंने बताया कि हरियाणा में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर धान की बुआई की गई है जिसमें से अधिकतर क्षेत्र जिला करनाल, कैथल, जींद, कुरुक्षेत्र और फतेहाबाद में आता है।
उन्होंने बताया कि पराली न जलाने के लिए सरकार की विभिन्न एजेंसियों ने व्यापक सूचना एवं शिक्षा अभियान चलाया है। इसके फलस्वरूप ये सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। इस अभियान में उपायुक्तों, उपमंडल अधिकारियों और अन्य अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक व प्रेरित किया। प्रवक्ता ने बताया कि इसके अतिरिक्त सरकार ने खेत में ही फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनीकरण को बढ़ावा देने हेतु फसल अवशेष प्रबंधन पर नई केंद्रीय योजना के तहत राज्य व जिला स्तरीय निगरानी समितियों का गठन किया है।