चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के 45 करोड़ रुपये केंद्र सरकार पर बकाया हैं, जिसे लगातार मांगा जा रहा है, लेकिन दो साल बाद भी यह रकम नहीं मिली है। हालांकि पांच करोड़ रुपये ऊष्मायन केंद्र के लिए जरूर मिल गए। शिक्षक भी रकम का इंतजार करते-करते दूसरे शोध कार्यों में जुट गए। यदि उक्त रकम मिल जाती तो वह इस कार्य को पहले करके परिणाम सामने लाते।
राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत केंद्र सरकार से पीयू से शोध प्रस्ताव मांगे थे। 150 से अधिक प्रस्ताव केंद्र को भेजे गए थे। इसमें से लगभग 110 प्रोजेक्ट पास कर दिए गए। रकम भी 50 करोड़ रुपये मंजूर हो गई लेकिन अब तक यह रकम नहीं मिल पाई। पांच करोड़ रुपये जरूर मिले थे। इस तरह 45 करोड़ अब भी बकाया हैं। हालांकि इसके लिए कई बार प्रयास किए गए। शिक्षकों का कहना है कि यह रकम मिलती तो वह शोध कार्य का अब तक परिणाम दे देते। दो साल में शोध पूरा हो जाता। साथ ही वह दूसरे प्रस्तावों पर और तेजी से कार्य कर पाते। कुछ शिक्षकों का कहना है कि पीयू की ओर से पूरी ताकत इसके लिए नहीं लगाई गई। वहीं दूसरी ओर पीयू का तर्क है कि कोरोना के आने के कारण यह रकम अटक गई, क्योंकि सरकार का ध्यान स्वास्थ्य क्षेत्र पर अधिक हो गया। कोरोना पर काम करने वाले शिक्षकों को बजट सरकार दे रही है। दूसरे प्रस्तावों पर कार्य के लिए भी रकम जल्द मिलेगी।