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हरियाणा की 1207 राइस मिलों में 42589 मीट्रिक टन धान का घोटाला, ब्याज सहित वसूलेगी सरकार

Thu, 09 Jan 2020 12:17 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हरियाणा की 1207 राइस मिलों ने 42589 मीट्रिक टन के धान घोटाले को अंजाम दिया है। खाद्य आपूर्ति विभाग की 300 जांच टीमों ने मिलों के भौतिक सत्यापन में इस घोटाले को पकड़ा है। 1304 राइस मिलों का जांच टीमों ने भौतिक सत्यापन किया, जिसमें से 1207 मिलों में 42589 मीट्रिक टन धान कम मिला। इससे सरकार को 90 करोड़ रुपये की चपत लगी है।

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राइस मिलर्स ने बिना धान खरीदे ही या तो सरकार से यह राशि प्राप्त कर ली या धान आगे ज्यादा दामों पर बेच दिया। खाद्य आपूर्ति विभाग ने इसे बड़ा घोटाला माना है। 90 करोड़ रुपये घोटाले की राशि को सरकार राइस मिलर्स से ब्याज सहित वसूलेगी। 

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने प्रेस वार्ता में बताया कि स्टॉक उपलब्धता और फर्जी धान खरीद की जांच करने के लिए 1304 चावल मिलों का भौतिक सत्यापन किया गया। जिसमें से 1207 राइस मिलों में 42,589 मीट्रिक टन (एमटी) की कमी पाई गई। 6440180.54 मीट्रिक टन के स्टॉक की जांच के लिए सत्यापन किया गया, जिसमें से मिलों में 6400400.28 मीट्रिक टन स्टॉक ही मिला। जिन मिलों के स्टॉक में कमी पाई गई हैं उनसे तीन-चार में नोटिस का जवाब मांगा गया है। 

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जवाब मिलने के बाद घोटाला करने वालों के खिलाफ सीएम मनोहर लाल व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के निर्णय अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। घोटाला करने पर मिलर्स पर तीन तरह की कार्रवाई बनती है। धान खरीद पर जारी लगभग 90 करोड़ रुपये को ब्याज सहित वसूल किया जाएगा। अनियमितता की संवेदनशीलता के आधार पर एफआईआर दर्ज करने और ब्लैकलिस्ट करने जैसे अन्य विकल्प भी अमल में लाए जाएंगे। 

सत्यापन के दौरान 205 मिलों के स्टॉक में 5 टन तक की कमी पाई गई है। इसी प्रकार 134 मिलों के स्टॉक में 5-10 टन तक, 248 मिलों में 10 से 25 टन तक, 325 मिलों में 25 से 50 टन तक और 295 मिलों के स्टॉक में 50 टन से अधिक की कमी मिली है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने माना कि मिलर्स को जो दस दिन मिले, उसमें उन्होंने स्टॉक को पूरा करने की कोशिश की है। हो सकता है मिलर्स ने दूसरी जगह से धान खरीदा हो या कहीं और रखे हुए धान को लाकर स्टॉक में शामिल किया।

करनाल जिले में सबसे अधिक घोटाला
करनाल जिले में सबसे अधिक 284 मिलों के स्टॉक में धान की कमी पाई गई है। उसके बाद कुरुक्षेत्र जिले की 236 मिलों, अंबाला जिले में 185 मिलों, फतेहाबाद में 168, यमुनानगर में 150 और कैथल जिले में 115 मिलों के स्टॉक में कमी पाई गई है। मिलों में 2808 मीट्रिक टन चावल भी अधिक मिला है, जिससे विभाग का कोई सरोकार नहीं है। हालांकि, सवाल उठता है कि यह चावल कहां से आया। 
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सत्यापन के दौरान विभाग ने आवंटित धान, मिलों की मिलिंग क्षमता, मिलों के पास चावल की उपलब्धता और एफसीआई को दिए गए चावल और मिलों के पास बचे हुए धान स्टॉक की जांच की गई। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि सत्यापन पर आज तक किसी भी राइस मिलर्स ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं करवाई है। चूंकि, पूरे सत्यापन की वीडियोग्राफी कराई गई है।

घोटाले से बचने के लिए राइस मिलों में खुद धान पहुंचाएगा विभाग
अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास ने कहा कि धान के स्टॉक को कही और ले जाने और फर्जी खरीद से बचने के लिए खरीद तंत्र को और अधिक मजबूत करेंगे। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब धान को मंडियों से मिल परिसर तक पहुंचाने का कार्य खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग व खरीद एजेंसियां करेंगी। धान की ढुलाई के लिए उपयोग होने वाले ट्रकों को जीपीएस युक्त किया जाएगा ताकि उनकी आवाजाही पर नजर रखी जा सके। ट्रकों में मौजूद स्टॉक के सही वजन के लिए धर्मकांटा भी विभाग अपने अधीन लेगा।

जिला अनुसार मिलों में कम पाया गया स्टॉक

  •  जिला         कुल मिलें      कम मिला स्टॉक
  • अंबाला        193            9403 मीट्रिक टन
  • फतेहाबाद      173          2240.149 मीट्रिक टन
  • हिसार          4               2.810 मीट्रिक टन
  • जींद            12            175.89 मीट्रिक टन
  • करनाल        302          13163.664 मीट्रिक टन
  • कैथल          135          1414.973 मीट्रिक टन
  • कुरुक्षेत्र        238          10767 मीट्रिक टन
  • यमुनानगर      159       4857 मीट्रिक टन
  • पंचकूला       26            393 मीट्रिक टन
  • पलवल         28           127 मीट्रिक टन
  • सिरसा         26            31 मीट्रिक टन
  
हुड्डा ने की सीबीआई जांच की मांग
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक बार फिर धान घोटाले की सीबीआई से जांच की मांग की है। उन्होंने कहा है कि अब तो सरकार की जांच में भी लगभग साफ हो गया है कि घोटाला हुआ है। बावजूद इसके सरकार ख़ुद दोषियों को बचाना चाह रही है। लेकिन, प्रदेश की जनता भ्रष्टाचार के इस खेल को बख़ूबी समझती है।
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