चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के आबकारी एवं कराधान विभाग ने मंगलवार को 42 शराब ठेकों को सील कर दिया। ये ठेके शहर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद हैं, जहां से शराब बेची जा रही थी। आरोप है कि इन ठेकों के ठेकेदारों ने निर्धारित समय सीमा के अंदर 33 करोड़ की बैंक गारंटी जमा नहीं की, जिसके बाद ही यह कार्रवाई की गई है।
21 मार्च को विभाग ने 96 शराब ठेकों की नीलामी की थी, जिससे विभाग को 606 करोड़ की लाइसेंस फीस मिली, जो कि 439 करोड़ के आरक्षित मूल्य से लगभग 36 फीसदी अधिक है। आबकारी नीति की धारा 21 के अनुसार, हर सफल बोलीदाता को लाइसेंस फीस के 15 फीसदी के बराबर की बैंक गारंटी विभाग की ओर से सूचित किए गए 7 वर्किंग दिनों के अंदर जमा करनी होती है। तय समय में ऐसा न करने पर ठेका रद्द कर दिया जाता है और सुरक्षा राशि जब्त कर ली जाती है। दिन पूरे होने के बाद चंडीगढ़ वाइन्स कांट्रेक्टर एसोसिएशन ने यूटी प्रशासन के मुख्य सचिव व अन्य अधिकारियों को जानकारी दी और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद वकील के माध्यम से लीगल नोटिस भेजा गया, जिसके बाद विभाग हरकत में आया और 42 ठेकों को सील कर दिया। हालांकि, एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि विभाग ने सिर्फ खानापूर्ति की है। सील करने के नाम पर सिर्फ ठेकों को बंद कराया गया है। उसके अंदर मौजूद स्टॉल को भी जब्त नहीं किया गया है।
96 में से 87 ठेके एक ही परिवार और सहयोगियों को देने का आरोप
यह मामला अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। स्थानीय ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि 2025-26 की आबकारी नीति के तहत हुई नीलामी में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। याचिका में कहा गया है कि 96 में से 87 ठेके एक ही परिवार और उसके सहयोगियों को दिए गए, जिससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विभागीय मिलीभगत से बैकडेटेड गारंटी जमा कराने की कोशिश, हो जांचः दर्शन सिंह क्लेर
चंडीगढ़ वाइन्स कांट्रेक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष दर्शन सिंह क्लेर ने इस मुद्दे पर विभाग को एक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि देर से जमा की गई किसी भी बैंक गारंटी को स्वीकार करना आबकारी नीति का सीधा उल्लंघन है और इससे कुछ बोलीदाताओं को अनुचित लाभ मिलता है। मांग रखी कि अंतिम समय सीमा के बाद कोई भी बैंक गारंटी स्वीकार न की जाए। सभी सफल बोलीदाताओं की सूची, उनकी बैंक गारंटी की स्थिति और जमा करने की तारीख और समय सार्वजनिक की जाए। जिन ठेकों की गारंटी समय पर जमा नहीं हुई, उन्हें तत्काल रद्द कर दोबारा नीलामी की जाए। पत्र में उन्होंने कहा कि एसोसिएशन को यह भी सूचना मिली है कि कुछ बोलीदाता विभागीय मिलीभगत से बैकडेटेड गारंटी जमा कराने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों की जांच होनी चाहिए और सभी बैंक गारंटी जमा करने के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए।