अपराध करने वाले नाबालिगों को सुधरने का मौका देने के लिए देश के कानून में उनके प्रति नरमी बरती गई है। किशोर न्याय अधिनियम (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) के तहत बच्चों और नाबालिगों के खिलाफ मामूली या कम सजाएं होती हैं। इसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं और अपराध के लिए बड़ी संख्या में बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आंकडे़ बताते हैं कि शहर में बीते तीन साल में नाबालिगों द्वारा 221 घटनाओं को अंजाम दिया गया, जिसमें 369 नाबालिगों की गिरफ्तारी हुई।
किशोर चोरी, डकैती, लूट, हत्या, दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, ज्यादातर किशोर वाहन चोरी, चोरी, सेंधमारी, डकैती और झपटमारी में गिरफ्तार हुए हैं। चंडीगढ़ पुलिस की मानव तस्करी रोधी इकाई (एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट) बच्चों को अपराध से बचाने को लेकर लगातार जागरूक भी करती रहती है, लेकिन इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। छह मार्च 2020 को यूटी पुलिस ने छह साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के आरोप में एक 12 वर्षीय लड़के को गिरफ्तार किया था।
हल्लोमाजरा में श्मशान घाट के पीछे जंगल क्षेत्र में सुबह करीब सात बजे नर्सरी कक्षा की एक छात्रा की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पीड़िता अर्धनग्न अवस्था में मिली। पुलिस ने कहा कि हत्या से पहले उसके साथ दुष्कर्म किया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई। लड़की का चेहरे पर पत्थर मारा गया था, जिससे पता चलता है कि हत्यारे ने उसे विकृत करने की कोशिश की ताकि लड़की की पहचान न हो सके। पुलिस ने जब इस मामले की जांच की तो पाया कि ये वारदात एक नाबालिग ने की है। बाद में पुलिस ने बच्ची के पड़ोस में रहने वाले लड़के को पकड़ लिया और बाल सुधार गृह भेज दिया।
बाल सुधार गृह से भी भाग निकलते हैं शातिर
सितंबर 2019 में सेक्टर-39 थाने अंतर्गत में हुई हत्या के केस में सजा काट रहे तीन नाबालिग अचानक सेक्टर-25 स्थित बाल सुधार गृह से भागने की कोशिश करने लगे। सुरक्षाकर्मियों ने चुस्ती दिखाते हुए मौके से दो नाबालिगों को दबोच लिया लेकिन एक भागने में कामयाब हो गया। पुलिस जांच में सामने आया कि मर्डर केस के तीन आरोपी पिछले कई वर्षों से जुवेनाइल होम के एक ही बैरक में बंद थे। तीनों आरोपियों ने भागने की कोशिश की। मेन गेट पर खड़े करीब चार सिक्योरिटी गार्डों की नजर पड़ी तो शोर मचाकर तीनों को दबोचने की भरपूर कोशिश की। इस दौरान हाथापाई भी हुई, लेकिन एक फरार हो गया। हालांकि बाद में उसे भी पुलिस ने पकड़ लिया गया।
जनवरी 2021 में सेक्टर-25 स्थित बाल सुधार गृह से एक नाबालिग फरार हो गया था। बाद में उसे पकड़ लिया था। आरोपी पर 2017 में सेक्टर-39 थाने में हत्या का केस दर्ज हुआ था। गिरफ्तारी के बाद नाबालिग होने पर उसे बाल सुधार गृह में रखा गया था। आरोपी ने 2017 में सेक्टर-37 स्थित बत्रा सिनेमा के पास एक युवक की हत्या कर दी थी।
बड़े अपराध में भी तीन साल के लिए भेजा जाता है बाल सुधार गृह
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील सिद्धार्थ सांवरिया कहते हैं कि बड़े आपराधिक वारदातों में भी अपराधी के नाबालिग होने की स्थिति में ज्यादा से ज्यादा तीन साल तक के लिए बाल सुधार गृह भेजा जा सकता है। बच्चों की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होती कि वह कुछ समझ पाएं। परिवार और समाज के कारण ही बच्चे अपराध की दुनिया में पैर रखते हैं। वर्तमान में सेक्टर-25 स्थित बाल सुधार गृह में 28 नाबालिग बंद हैं। इनमें से 13 नाबालिगों को आपराधिक मामलों में सजा हो चुकी है। 18 साल उम्र पूरी होने के बाद उन्हें बुड़ैल जेल में शिफ्ट कर दिया जाता है।
वर्ष अपराध संख्या कितने नाबालिग पकड़े
2019 117 208
2020 50 78
2021 54 83
बच्चों की परवरिश में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है। बच्चे को स्कूल भेजने से लेकर घर आने तक उसकी सभी गतिविधियों और संगत पर नजर रखें। अगर उनके व्यवहार में बदलाव महसूस हो तो डॉक्टर की सलाह लें। अगर बच्चे नशा करते हैं तो उनमें बदलाव नजर आ जाता है। जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लें। पुलिस यदि बच्चों को गिरफ्तार करती है तो पुलिस को हर एक एंगल पर जांच करनी चाहिए। यह पता लगाना चाहिए कि बच्चे अपराध में शामिल क्यों हो रहें। इसे गंभीरता से लेना चाहिए और इसकी तह तक जाना चाहिए। - जगबीर सिंह, सेवानिवृत्त डीएसपी (क्राइम), चंडीगढ़ पुलिस