पीजीआई के इस हॉस्पिटल की स्वीकृति साल 2010 में मिली थी। साल 2013 में आकर इसका निर्माण बंद हो गया। उस वक्त दो बड़े कारण थे। पहला इन्वायरमेंट क्लीयरेंस न मिलना और दूसरा हॉस्पिटल की 16 जरूरी सर्विस का गायब होना। हॉस्पिटल का लगभग 50 प्रतिशत काम हो गया था, लेकिन मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम, एडिशनल एलिवेटर्स, हाट वाटर सप्लाई, ऑपरेशन थियेटर, रेनवाटर हार्वेस्टिंग, फर्नीचर, सीसीटीवी कैमरे और इमरजेंसी लाइटिंग के बारे में सोचा नहीं गया।
दो साल तक निर्माण बंद होने से इस प्रोजेक्ट की करीब 90 करोड़ रुपये की कास्ट भी बढ़ी। हालांकि बाद में पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम और डिप्टी डायरेक्टर अमिताभ अवस्थी ने इस प्रोजेक्ट को मुख्य रूप से लिया और रुके काम को चालू करवाने के लिए दिन रात एक कर दिया। साल 2017 में इसका निर्माण फिर से शुरू हुआ और हॉस्पिटल के निर्माण के लिए अतिरिक्त ग्रांट और डॉक्टरों की पोस्ट भी स्वीकृत करवाई।
यह हॉस्पिटल 334 बेड का है। इसका निर्माण 31 जनवरी तक पूरा होने की संभावना है। इस हॉस्पिटल के निर्माण से पीजीआई में 2174 बेड हो जाएंगे, जिससे मरीजों को काफी फायदा पहुंचेगा। -प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई