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छात्रों ने वीसी को भेजी 300 मेल, बोले- कोरोना से आर्थिक स्थिति ठीक नहीं, केवल ट्यूशन फीस लें

Wed, 05 Aug 2020 02:51 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो कविता बिश्नोई, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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पीयू के कई विभागों द्वारा 5 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी के साथ फीस जमा करवाने के नोटिस के बाद विद्यार्थियों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। एनएसयूआई और अन्य विद्यार्थियों ने इसको लेकर पीयू वीसी प्रो राजकुमार को लगभग 300 ई-मेल की है। छात्रों का कहना है कि एक तो कोविड-19 महामारी के कारण परिजनों का रोजगार प्रभावित हुआ है।
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वहीं अभी असम और बिहार से पीयू पढ़ने वाले परिवारों की बाढ़ के कारण आर्थिक हालात खराब हो गई है। ऐसे कठिन हालात में पीयू को केवल ट्यूशन फीस ही लेनी चाहिए, लेकिन 2020-21 के सेशन के लिए पांच प्रतिशत फीस बढ़ा दी है। अमर उजाला ने मंगलवार को कई विभागों के विद्यार्थियों से फीस स्ट्रक्चर के बारे में बातचीत की।

ये ली जा रही है फीस
विद्यार्थियों ने बताया कि एमएससी- माइक्रोबियल बायो टेक्नोलॉजी की पूरे साल की फीस एक लाख सात हजार सत्तर रुपये है। इसमें 62,575 ट्यूशन फीस, 38,730 मेंटेनेंस व अन्य यूजर चार्जेज और 5765 कॉन्ट्रिब्यूशन टू फंड्स के हैं। एमएससी फिजिक्स एंड इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल फीस 86,595 हैं। इसमें 21,410 मैटनटेंस व अन्य यूजर चार्जेज और 4765 कॉन्ट्रिब्यूशन टू फंड्स के हैं।
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वहीं यूआईईटी के बीई कोर्सेज की कुल फीस 99,295 है। इसमें 76,800 ट्यूशन फीस, 16,730 मैटनटेंस व अन्य यूजर चार्जेज और 5765 कॉन्ट्रिब्यूशन टू फंड्स के चार्ज किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि लॉकडाउन में विद्यार्थियों ने यूनिवर्सिटी के रिसोर्सेज इस्तेमाल ही नहीं किए हैं और अगला सेमेस्टर भी ऑनलाइन है। इसलिए विद्यार्थी ट्यूशन फीस के अलावा अन्य चार्जेज क्यों दें।

फीस माफी के लिए चांसलर और उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू को भी लिखा पत्र

एनएसयूआई अध्यक्ष निखिल नरमेटा ने बताया कि वे फीस माफ को लेकर पीयू चांसलर और उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू को भी कई पत्र लिख चुके हैं। पीयू के अधिकारी इस कठिन समय में विद्यार्थियों और उनके परिवारों का आर्थिक शोषण करने में लगे हैं। विद्यार्थियों ने तीन दिन पहले पीयू वीसी को विरोध स्वरूप राखी भी भेजी।

छात्र कुंदन बोले- बिहार में बाढ़ के कारण सारी फसल हुई चौपट
पीयू यूआईआईटी से इलेक्ट्रॉनिक्स में बीई कर रहे छात्र कुंदन ने बताया कि वे मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता किसान है। बिहार में बाढ़ आने के कारण उनकी सारी फसल खराब हो गई है। अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए उन्होंने एजुकेशन लोन लिया हुआ है। इस सेशन में वे इंजीनियरिंग के चौथे साल में हैं।

पीयू हर साल फीस में इजाफा कर देती है। कोविड-19 के कारण पहले ही काम प्रभावित था और अब बाढ़ ने आर्थिक हालात खराब कर दिए हैं। उन्होंने कहा बिहार और असम के कई छात्र पीयू में पढ़ते हैं। यूनिवर्सिटी को विद्यार्थियों की समस्या सुनकर उनके पक्ष में फैसला लेना चाहिए।

पीयू सिर्फ ट्यूशन फीस ही वसूले
बीई इलेक्ट्रॉनिक्स के दूसरे वर्ष के छात्र सात्विक ने बताया कि उनके पूरे वर्ष की फीस एक लाख के करीब है। इसमें ट्यूशन फीस 76 हजार के करीब है। उन्होंने कहा कि खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए पीयू सिर्फ ट्यूशन फीस ही वसूल करें।
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क्या कहते हैं सीनेट और सिंडिकेट सदस्य

पीयू सीनेट सदस्य डॉ. जगदीश चंद्र मेहता ने कहा कि विद्यार्थियों की फीस में कटौती की मांग जायज हैं। लेकिन विद्यार्थियों को यह भी समझना होगा कि वे पीयू के फिजिकल रिसोर्सेज इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। इसकी जगह यूनिवर्सिटी ऑनलाइन टीचिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है, यह भी विद्यार्थियों के हित में हैं। डॉ. मेहता ने बताया पीयू को सरकार की तरफ से ग्रांट नहीं आ रही है। ऐसे पीयू पूरी फीस माफ़ करने की स्थिति में नहीं है। जिनके परिवार के आर्थिक हालात खराब हैं, उनकी फीस माफ की जाए।

फीस नेशनल मुद्दा.. पीयू प्रशासन स्टूडेंट लीडर से करें संवाद
पीयू सिंडिकेट सदस्य डॉ. रुबिंदरनाथ शर्मा ने कहा कि फीस बढ़ोतरी कोविड-19 महामारी के दौर में नेशनल मुद्दा बना हुआ है। पीयू प्रशासन को स्टूडेंट लीडरशिप के साथ संवाद करना चाहिए। जब तक पीयू विद्यार्थियों से बातचीत करके तालमेल नहीं बैठाएगा, तब तक इस मुद्दे का हल नहीं निकल सकता।
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