दो साल बाद नाबालिग को न्याय मिला। कोर्ट ने उसके साथ दुराचार करने वाले पांच युवकों को 25-25 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मामला चंडीगढ़ का है, वहीं आरोपियों में रेलवे कॉलोनी, मौलीजागरां निवासी चंद्रशेखर (22), गोबिंदपुरा मनीमाजरा निवासी बंसी (35), गांव फैदां के सुरजीत सिंह (35) और शेखर राणा (21) के अलावा सेक्टर-68 गुरुद्वारे के पीछे कुंबड़ा, मोहाली निवासी साहिल वर्मा (22) शामिल हैं। अदालत ने प्रत्येक दोषियों पर 2.15 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है।
इस राशि में से 2-2 लाख रुपये प्रत्येक में से (कुल 10 लाख) बतौर मुआवजा पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं। वहीं दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद कोर्ट रूम के बाहर मौजूद उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। उन्हें पुलिस ने किसी तरह शांत करवाकर वहां से भेजा। मनीमाजरा थाना पुलिस ने पांचों के खिलाफ सितंबर 2015 में आईपीसी की धारा 363, 376, 376 (डी) और पॉक्सो एक्ट 4, 8, 12 के तहत मामला दर्ज किया था। 12 सितंबर, 2015 को दर्ज मामले के अनुसार 17 वर्षीय और 12वीं में पढ़ने वाली पीड़िता 11 सितंबर की शाम करीब 7 बजे ट्यूशन से घर आ रही थी।
जैसे ही वह रास्ते में एक पार्क के पास पहुंची तो एक सफेद रंग की वैन उसके पास आई और उसमें से एक युवक ने उसका हाथ पकड़ उसे जबरन अंदर खींच लिया। पीड़िता ने शोर मचाया तो दूसरे युवक ने उसके मुंह पर हाथ रख लिया। वैन में पांच युवक सवार थे। सभी आरोपी उसे कलाग्राम के पास जंगली एरिया में ले गए। वहां पांचों आरोपियों ने उसके साथ बारी-बारी से दुराचार किया। दुराचार के बाद सभी उसे वहीं छोड़ कर फरार हो गए। जैसे-तैसे वह रात 11 बजे घर पहुंची। उस समय वह बेहद घबराई हुई थी और डर के कारण उसने घटना के बारे में परिजनों को कुछ नहीं बताया।
अगले दिन उसकी हालत बहुत खराब देख उसकी मां ने उसे पूछा तो उसने हिम्मत कर उसने अपने साथ हुई वारदात के बारे में सब कुछ बता दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी।
पीड़िता ने की थी सभी दोषियों की पहचान
प्रतीकात्मक तस्वीर
पुलिस पीड़िता को मेडिकल के लिए अस्पताल ले गई तो उसे वहां हालत गंभीर होने पर भर्ती करना पड़ा। वहीं पुलिस ने पांच अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू की। 13 सितंबर को पुलिस ने जांच के आधार पर चंद्रशेखर को गिरफ्तार किया और उसका रिमांड हासिल किया। रिमांड के दौरान पुलिस ने उसकी निशानदेही पर अन्य दोषियों बंसी, सुरजीत सिंह, शेखर राणा और साहिल वर्मा को अलग-अलग तारीख पर गिरफ्तार किया था। पीड़िता द्वारा सभी दोषियों की पहचान करने के बाद पुलिस ने सभी के खिलाफ केस दर्ज किया था।
कई दिनों तक सदमे में रही थी पीड़िता
वारदात के बाद पीड़िता बहुत सदमे में आ गई थी। वहीं उसे चोट भी बहुत आई थी। उसके प्राइवेट पार्ट्स में अंदरूनी हिस्सों तक में गंभीर जख्म थे। इस कारण उसे कई दिन तक मनीमाजरा स्थित सरकारी अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा था। उसके पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। उसकी मां लोगों के घर में काम कर अपना और उसका पालन-पोषण कर रही थी। इस हादसे के बाद दोनों मां-बेटी टूट से गए थे। लेकिन, पीड़िता ने हिम्मत नहीं छोड़ी और दोषियों के खिलाफ अदालत में खुलकर गवाही दी थी।
ऐसे आए थे पुलिस गिरफ्त में
पीड़िता के लिए सभी दोषी अंजान थे। वह केवल एक दोषी को पहचानती थी जो उसके घर के पास दूध देने आता था। यहीं से पुलिस को जांच के लिए सुराग मिला था। पुलिस ने किसी तरह एक दोषी चंद्रशेखर की फोटो निकलवाई और उसे पीड़िता को दिखाया। उसने उसे पहचान लिया। इसके बाद पुलिस ने उसे तलाश कर उसे गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ के आधार पर ही अन्य दोषी गिरफ्तार हुए।
यह कहा कोर्ट ने आदेश में
कोर्ट
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम आर जोशी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषियों जिनमें तीन 22 साल और दो 35 साल के हैं, उन्होंने 17 साल की छोटी बच्ची से दुराचार किया है। वे उसे उस समय किडनैप कर ले गए जब वह ट्यूशन से लौट रही थी। यह गंभीर अपराध न केवल पीड़िता के साथ बल्कि समाज के एक बड़े तबके के साथ है। आदमियों से जिनसे लड़कियों को प्रोटेक्ट करने की उम्मीद की जाती है, उनके द्वारा ऐसा अपराध करना बेहद निंदनीय है। दोषियों ने जिस तरह का अपराध किया है, उसमें उन पर बिल्कुल भी नरमी नहीं बरती जा सकती। पीड़िता को दोषियों ने जो जिंदगी भर का जख्म दिया है, उससे एक के प्रति भी नरमी नहीं बरती जा सकती।
पीड़िता ने कहा, न्याय मिलने से मिला सुकून
पीड़िता की वकील प्रतिभा भंडारी के अनुसार कोर्ट के फैसला सुनाए जाने के बाद उन्होंने पीड़िता को फोन कर फैसले की जानकारी दी। एडवोकेट भंडारी के अनुसार, पीड़िता ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई और उन्हें कहा कि आज जाकर उन्हें न्याय मिला है। साथ ही उसने मामले में फैसला आने पर सुकून जताया।
परिवार और छोटे बच्चों की दुहाई दे मांगी नरमी
पांचों दोषियों ने अदालत के सामने परिवार और छोटे बच्चों की दुहाई देते हुए उन्हें सजा सुनाए जाने में नरमी बरतने की अपील की। चंद्रशेखर ने अदालत से अपील की कि उसके पिता पीजीआई में इमरजेंसी में भर्ती हैं। उनके बाद घर का पालन पोषण करने वाला अब उसके अलावा कोई नहीं है। अभी उसकी शादी भी नहीं हुई है। वह अन्य किसी भी आपराधिक मामले में शामिल भी नहीं है। वहीं बंसी ने अदालत से तीन छोटे-छोटे बच्चों का पिता होने की दुहाई देकर नरमी की अपील की। शेखर राणा ने जज से पांच दिन पहले ही उसे बेटी होने की दलील देते हुए उसे कम से कम सजा देने की अपील की।