अरावली की पहाड़ियों के साथ लगते हरियाणा के जिले गुरुग्राम, फरीदाबाद और नूंह में 206 स्टोन क्रशर व स्क्रीनिंग प्लांट चल रहे हैं। हालांकि अरावली क्षेत्र में कोई भी स्टोन क्रशर नहीं है। वहीं, इन स्टोन क्रशर में खनिज ले जाने वाहनों की जांच के लिए तीन जिलों में सिर्फ दो नाका स्थापित किए गए हैं। हरियाणा सरकार ने यह दावा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में दाखिल एक शपथ पत्र में किया है। पिछली सुनवाई में एनजीटी ने सवाल उठाया था कि जब खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ है तो इन इलाकों में स्टोन क्रशर कैसे चल रहे हैं?
एनजीटी अरावली क्षेत्र में हो रहे अवैध खनन के मामले में सुनवाई कर रही है। अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सरकार से स्टोन क्रशर, खनिज ले जाने वाले वाहनों की निगरानी, उनके रिकॉर्ड और नाकों की संख्या के बारे में पूछा था। इन सवालों के जवाब हरियाणा सरकार की ओर से खान एवं भूविज्ञान निदेशक की ओर से दायर हलफनामे में दिए गए हैं।
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सरकार का कहना है कि वह जिला प्रशासन के समन्वय से फरीदाबाद, गुरुग्राम और नूंह के अरावली पहाड़ी क्षेत्र में अवैध खनन को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। हलफनामे के मुताबिक फरीदाबाद में 80, गुरुग्राम में 31 और नूंह में 95 स्टोन क्रशर संचालित हो रहे हैं। वहीं, इन स्टोन क्रशरों व स्क्रीनिंग प्लांटों द्वारा खनिजों की खरीद और आपूर्ति पर निगरानी व क्रास चेकिंग के लिए तंत्र विकसित है।
खनिज ले जाने वाहनों की जांच के लिए फरीदाबाद के पाली क्रशर जोन व नूंह में राजस्थान सीमा पर हरियाणा-भरतपुर बार्डर के पास नाका स्थापित किया गया है। उपरोक्त नाका पर एक अलग रजिस्टर रखा गया है। इसके अलावा खनिजों को ले जाने वाले वाहनों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाता है। इसमें वाहन का नंबर, मालिक का नाम, खनिज का वजन, दिनांक, समय, परिवहन परमिट व उस आपूर्तिकर्ता का भी नाम, जिससे खदान सामग्री लाई गई है। सरकार ने यह भी बताया है कि अरावली रेंज में प्रभावी निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा और संवेदनशील क्षेत्रों/स्थानों/नाकों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
सरकार ने बनाया है अरावली कायाकल्प बोर्ड
फरीदाबाद, गुरुग्राम और नूंह में एकीकृत पर्यावरण प्रबंधन और अरावली रेंज के सतत विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अरावली कायाकल्प बोर्ड नाम का गठन किया गया है। इसमें सात सदस्य होंगे। इसके चेयरमैन डीसी होंगे। बोर्ड का कार्य प्रशासनिक एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना। अवैध खनन से संबंधी शिकायतों को निपटाना है। अरावली पहाड़ियों में अवैध खनन पर रोक के साथ-साथ क्षेत्रों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए नीतियां बनाना है। अरावली रेंज के एकीकृत पर्यावरण प्रबंधन और सतत विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाना और उन्हें लागू करना। अरावली पर्वतमाला के क्षेत्र में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और वनस्पतियों, जीवों और समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के लिए कदम उठाना।
एनजीटी ने हरियाणा सरकार की खिंचाई
वहीं, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अरावली में जारी अवैध खनन को लेकर हरियाणा सरकार की खिंचाई की है। एनजीटी का कहना है कि अवैध खनन को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने जो कार्यवाही रिपोर्ट दी है, उसमें दम नहीं है। ट्रिब्यूनल द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने पाया कि अरावली के इलाकों में ताजा खनन के संकेत मिले हैं। वहीं, बिना अनुमति के पेड़ों की कटाई और खुदाई की गहराई 9 फीट तक सीमित रखने संबंधी खनन शर्तों का उल्लंघन किया गया है।