पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह।
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2021 का आगमन हो चुका है। इस साल पंजाब में सियासी दलों को अपना खोया हुआ जनता का समर्थन पाना चुनौतीपूर्ण रहेगा, वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार को सत्ता विरोधी लहर को कुंद करने के लिए भी कसरत करनी होगी। पंजाब के उद्योगों को पटरी पर लाने के लिए उद्यमियों को पीएम मोदी से आस है, वहीं किसान आंदोलन पर पूरे विश्व की नजरें हैं। किसानों का संघर्ष ही पंजाब की अगली राजनीति की दिशा तय करेगा। इसके अलावा सरकारों के लिए पराली का प्रबंधन भी चुनौतीपूर्ण रहेगा।
सियासी दलों के लिए उठापटक वाला होगा साल
पंजाब में 2021 का साल सियासी उठापटक वाला होगा। राज्य में 2022 में विधानसभा चुनाव होने हैं। अकाली दल व भाजपा गठबंधन टूट चुका है। अकाली दल पंजाब में अपनी सियासी जमीन को दोबारा तलाश रहा है। शिअद के लिए जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी, श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप के गायब होने के मामले, कृषि कानूनों की शुरुआती दौर में हिमायत जैसे मामलों से निपटना चुनौतीपूर्ण रहेगा। वहीं भाजपा के बिना शहरों में प्रसार करने के लिए भी अकाली दल को पूरी कसरत करनी होगी।
कांग्रेस के लिए सत्ता विरोधी लहर से निपटना आसान नहीं होगा। भाजपा 117 सीटों पर चुनाव लड़ने का दावा कर रही है। कृषि कानूनों के कारण भाजपा का ग्रामीण इलाकों में डटकर विरोध हो रहा है। 1997 के बाद से पहली बार पार्टी अकेले चुनाव लड़ने जा रही है। वहीं आम आदमी पार्टी दिल्ली में सत्ता पाने के बाद उत्साह से लबरेज है और पंजाब के लिए दोबारा कोशिशों में जुटी है। टूट चुकी पार्टी को दोबारा एकजुट कर मजबूती से पंजाब विधानसभा चुनावों में उतारना अरविंद केजरीवाल के लिए चुनौतीपूर्ण रहेगा। कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू को भी पंजाब की राजनीति में दोबारा आगे आने के लिए पूरी कसरत करनी होगी। उन्हें अपने पत्ते खोलने पड़ेंगे कि वह आगे कांग्रेस की किश्ती में ही सफर करेंगे या फिर किसी अन्य सियासी दल का दामन थामेंगे।
पंजाब में हो सकता है एक नई पार्टी का गठन
किसानों का संघर्ष ही पंजाब की राजनीति की अगली दिशा तय करेगा। किसान पिछले 37 दिन से दिल्ली बॉर्डर पर धरना लगाकर बैठे हैं। सरकार के साथ कई चरण की बात हो चुकी है, लेकिन किसान टस से मस नहीं हो रहे हैं। तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर अड़े किसानों का संघर्ष पंजाब की राजनीति को नई दिशा देगा। अब तक किसान नेताओं ने किसी राजनीतिक दल को अपनी स्टेज पर नहीं आने दिया है। अगर पंजाब के किसान जीतकर आते हैं तो पंजाब में एक नई पार्टी का गठन हो सकता है, जिसमें संघर्ष के दौरान किसानों का साथ देने वाले गायक भी शामिल हो सकते हैं।
उद्यमियों को मोदी से आशा, उद्योगों को प्रफुल्लित करना चुनौती
उद्यमियों को इस साल केंद्र सरकार से काफी आशाएं हैं। खासकर पाइप फिटिंग, वॉल्व एंड कॉक्स इंडस्ट्री और खेल उद्योग की निगाह पीएम नरेंद्र मोदी पर है। चीन से तेजी से पाइप फिटिंग, वॉल्व एंड कॉक्स व खेल का सामान आ रहा है। इससे पंजाब की इंडस्ट्री की कमर टूट गई है। फोकल प्वाइंट एक्सटेंशन के प्रधान नरिंदर सग्गू का कहना है कि पीएम मोदी भारतीय उद्योगों को अगर प्रफुल्लित करना चाहते हैं तो उन्हें चीन से आने वाले उस सामान पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगानी होगी जिसका निर्माण भारत में हो रहा है। चीन का सस्ता सामान आने हमारी इंडस्ट्री तबाह हो रही है।
एनआरआई के निवेश को लाना भी चुनौती
पंजाब एनआरआई लोगों का हब माना जाता है। यहां से भारी संख्या में लोग विदेशों में बसे हैं। पंजाब के विकास में एनआरआई का योगदान जबरदस्त रहा है। खासकर गांवों को आधुनिक बनाने में विशेष योगदान दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से एनआरआई का पंजाब से मोह भंग हो रहा है। रियल एस्टेट में निवेश करने वाले एनआरआई अब दूर भाग रहे हैं। रियल एस्टेट कारोबारी राजन चोपड़ा का कहना है कि पंजाब में हर साल करोड़ों रुपये एनआरआई लोग निवेश करते थे, लेकिन कुछ वर्षों से महज 25 फीसदी निवेश हो रहा है। एनआरआई का विश्वास जीतना भी सरकार व पंजाब के लोगों के लिए जरूरी है।
भारत-पाक सीमा पर सख्ती की जरूरत
भारत-पाक सीमा पर हेरोइन तस्करी को रोकना मुश्किल हो रहा है। 2020 में बीएसएफ ने पंजाब सीमा से 497 किलो हेरोइन बरामद की थी। 2019 में रिकवरी 228 किलो थी और 2018 में 279 किलो। पंजाब सीमा पर पाकिस्तान ने हेरोइन की तस्करी बढ़ा दी है। वहीं पंजाब कश्मीरी आतंकवादियों का केंद्र भी बन रहा है। इसे रोकना केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। पंजाब सीमा पर पाकिस्तान के ड्रोन भी दहशत फैला रहे हैं।
पराली की समस्या से निजात के लिए पायलट प्रोजेक्ट की उम्मीद
पंजाब में धान के सीजन में 49 फीसदी अधिक घटनाएं पराली जलाने की हुई हैं। 2020 में पराली जलाने की 36,755 घटनाएं हुईं, जबकि 2019 में इसी अवधि में ऐसी घटनाओं की संख्या 24,726 थी। दिल्ली सरकार हर साल दावा करती है कि पंजाब की पराली जलाने से दिल्ली में प्रदूषण फैलता है। पंजाब के लिए केंद्र सरकार को एक पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा करनी होगी। जिससे पराली को एकत्रित कर उसका इस्तेमाल ईंधन के लिए किया जा सके।
पंजाब में गिरता जलस्तर बड़ी समस्या
पंजाब में विभिन्न स्थानों पर 300 से 1000 फुट गहराई तक बोर कर पानी निकाला जा रहा है। किसान ट्यूबवेल का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्यूबवेल की संख्या 14 लाख से अधिक है। प्रति व्यक्ति पानी का इस्तेमाल भी दोगुना हो रहा है। प्रति व्यक्ति पानी की खपत 150 के बजाय 380 लीटर की जा रही है।
सर्वे के अनुसार शहरों में भी 70 फीसदी पानी रोजाना बर्बाद किया जा रहा है। धान की फसल में पानी की खपत अधिक हो रही है। एक किलो चावल पैदा करने के लिए 5500 लीटर पानी का इस्तेमाल हो रहा है। पानी को कैसे बचाना है, इसके लिए सूबा व केंद्र सरकार को एक साथ मिलकर योजना तैयार करनी होगी।