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1984 सिख दंगा पीड़ितों ने सुनाई आपबीती, बोले-आज भी न्याय का इंतजार है

Sat, 18 May 2019 05:36 PM IST
ajay kumar एजेंसी, लुधियाना
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सांकेतिक तस्वीर
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1984 के सिख दंगों के पीड़ितों को आज भी न्याय का इंतजार है। 75 साल की गुरजाल कौर कहती हैं कि उनकी घर की गंदी और सीलन भरी दीवारें देखकर ऐसा लगता है जैसे घूरती हों। उनका कहना है कि 84 के दंगों की यादे आज भी खून के ताजे घावों में बदल जाती है।

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पंजाब में 19 मई रविवार को मतदान है। कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा की 1984 के दंगों पर की गई टिप्पणी 'हुआ तो हुआ' और इस पर भाजपा की आक्रमकता ने सिख विरोधी दंगों को राजनीतिक चर्चा पर ला दिया है। 

लुधियाना की सीआरपीएफ कॉलोनी में दंगों के बचे लोगों का दावा है कि लगातार कांग्रेस की सरकारों ने पीड़ित परिवारों को न्याय देने में देरी की। कौर, जिन्होंने अपने दो बेटों हरभजन सिंह और अमरजीत सिंह को 1984 के दंगों में खोया था। उनका दावा है कि अकालियों ने दंगों से बचे लोगों की सबसे अधिक मदद की है और केंद्र और राज्य की पिछली कांग्रेस सरकारों ने हमारे जीवन को बर्बाद कर दिया।
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दंगों में अपने दो बेटों और पति को खोने वाली 59 साल की चरणजीत कौर कहती हैं, ' हमने देखा विभाजन के दौरान लोगों ने क्या नहीं देखा। भीड़ ने हजारों सिख पुरुषों को जिंदा जला दिया और महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया।'

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1984 सिख कत्लेआम पीड़ित वेलफेयर सोसाइटी की महिला शाखा की गुरदीप कौर ने पंजाब की पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल पर आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा दिए गए अनुदान को राज्य में पीड़ित परिवारों तक नहीं पहुंचने दिया। 'अकाली सरकार ने कुछ कदम उठाए लेकिन वे पर्याप्त नहीं थे। पंजाब में लगभग 35,000 दंगा प्रभावित परिवार हैं और बादल सरकार ने केवल 3,000 को फ्लैट दिए'।

'चार आयोग, नौ कमेटी और दो एसआईटी को हत्याओं की जांच के लिए गठित किया गया था। क्यों? यह स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकारें दंगों में किसी एक की भूमिका को छिपाना चाहती थीं'

पूर्व आप नेता और वरिष्ठ वकील एचएस फुलका अदालत के मामलों में दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। उनका कहना है कि सिख विरोधी दंगों में शामिल नेताओं को दंडित करने के बजाय कांग्रेस ने उन्हें ऊपर उठाया और बढ़ाया है।

'नाम न छापने की शर्त पर पंजाब कांग्रेस के एक नेता का कहना है कि दंगा पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की प्रतिबद्धता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ था, उसका विरोध करने के लिए उन्होंने खुद संसद से इस्तीफा दे दिया था।'
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