हरियाणा के 17वें राज्यपाल के रूप में सत्यदेव नारायण आर्य ने शपथ ग्रहण की। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कृष्ण मुरारी ने पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई। राजभवन में आयोजित समारोह में हरियाणा के नए राज्यपाल ने समारोह में आए महानुभावों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की और उनकी बधाई स्वीकार की।
समारोह में राज्यपाल के परिवार से उनके सुपुत्र ओमप्रकाश रंजन व कौशल किशोर, पुत्री सुनंदा व कंचनमाला और उनके रिश्तेदार भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल, हरियाणा भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, श्रम व रोजगार मंत्री नायब सैनी, विधानसभा अध्यक्ष कंवर पाल, एचपीएससी सदस्य नीता खेड़ा समेत अन्य नेतागण व अफसर मौजूद रहे।
चंडीगढ़ पहुंचने पर सत्यदेव नारायण आर्य व उनकी पत्नी सरस्वती देवी का हरियाणा के सीएम ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान राज्यपाल को परेड के जरिए सलामी भी दी गई। अंत में राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य और मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सभी नागरिकों को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दी।
ये है राज्यपाल का परिचय
हरियाणा के राज्यपाल
नवनियुक्त राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य का जन्म 1 जुलाई 1939 को गांधी टोला, राजगीर, जिला नालंदा (बिहार) में हुआ। वे पटना विश्वविद्यालय से एमए व एलएलबी पार्ट-1 हैं। वे बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री और खान व भूतत्व विभाग के मंत्री का पद संभाल चुके हैं। वे राजगीर विधानसभा क्षेत्र से 8 बार चुनाव जीत चुके हैं।
सत्यदेव नारायण आर्य, एस एन आर्या के नाम से जाने जाते हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के एक दिग्गज नेता रहे हैं और बिहार राज्य से संबंध रखते हैं। एस एन आर्या बिहार में खान एवं भूविज्ञान मंत्री रह चुके हैं। वे अपने विधानसभा क्षेत्र नालंदा के राजगीर से आठ बार विधायक रह चुके हैं। हरियाणा में वे 17वें राज्यपाल के रूप में प्रदेश की कमान संभालेंगे। एक जुलाई 1947 को जन्मे सत्यदेव नारायण ने एमए एलएलबी पार्ट वन की शिक्षा प्राप्त की है। खेती और समाज सेवा से जुड़े कार्य करना उनको पसंद हैं।
सत्यदेव नारायण आर्य जनसंघ के पुराने नेता हैं। इनका जन्म राजगीर के गांधी टोला में एक साधारण परिवार में हुआ। जन्म से पहले ही पिता शिवन राम की मौत हो गई थी, इसलिए इनका लालन-पालन चाचा रामफल आर्य ने किया। दलित नेता आर्य सभी वर्गों के बीच काफी लोकप्रिय रहे हैं। आर्य बिहार सरकार में पहली बार रामसुंदर दास मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास विभाग मंत्री और फिर 2012 में नीतीश मंत्रिमंडल में खान एवं भूतत्व मंत्री बनाये गए।
राजनीति में आने से पहले आर्य चंडी प्रखंड में कार्यालय सहायक पद पर कार्यरत थे, लेकिन नौकरी छोड़कर आर्य ने 1972 में भारतीय जनसंघ के टिकट पर भाग्य आजमाया। यह चुनाव वह हार गये। 1977 में वह फिर चुनाव लड़े और भारी बहुमत से चुनाव जीते। इसके बाद वह एक के बाद एक चुनाव जीतते रहे। 2015 के चुनाव में भाजपा ने इन्हें राजगीर का उम्मीदवार बनाया था, लेकिन पार्टी की अंदरूनी कलह से जदयू प्रत्याशी से वह मात खा गए।