यह सार्स की फैमिली से ही है। वैज्ञानिकों ने रिसर्च रिव्यू में यह भी कह दिया था कि कोविड- 2 अन्य वायरसों से कई गुना ताकतवर होगा। कई अन्य विश्लेषण भी किए थे। वैैज्ञानिकों का मानना है कि कई जीवों से वायरस निकलकर चमगादड़ में पहुंचा और वह कई गुना ताकत लेकर बाहर निकला। जानवरों ने अपने बचाव के लिए वायरस विकसित किया है।
मालूम हो कि दुनिया भर के वैज्ञानिकों की ओर से वायरस पर किए गए शोध के बाद जो रिसर्च होता है, उसे रिव्यू कहा जाता है। यानी सभी रिसर्च का निचोड़। इन चार वैज्ञानिकों ने वही निचोड़ निकाला और दुनिया के सामने जर्नल के जरिए रख दिया। नियमत: इस जर्नल आलेख पर सरकारों व पॉलिसी मेकर्स को काम करना चाहिए था लेकिन वह सोते रहे। चीन ने तो आंखें मूंदी ही, उसके साथ पूरी दुनिया भी सोती रही।
क्या कहते हैं ट्राइसिटी के वैज्ञानिक
चेतावनी को दरकिनार करने का अंजाम दुनिया के सामने
रिसर्च जर्नल के जरिए दुनिया की चिंता के संकेतों को सामने रखा गया था। बावजूद इसके चीन में सार्वजनिक रूप से महामारी पैदा करने वाले वन्यजीवों को दूर नहीं रखा गया। वैज्ञानिकों की चेतावनी को नीति निर्माताओं द्वारा गंभीरता से नहीं लिया गया। यदि ऐसा होता तो आज हालात अलग होते। यह प्रकरण जांच का विषय है। साथ ही आगे के लिए भी सबक होगा। - प्रो. सरनजीत सिंह, ऑफिशिएटिंग डायरेक्टर, नाइपर मोहाली
वैज्ञानिकों ने इस वायरस पर हुए रिसर्च का जो रिव्यू किया है उसके जरिए पॉलिसी मेकर आदि को आगाह किया गया था। इस पर चीन के साथ-साथ पूरी दुनिया को काम करना चाहिए था लेकिन आज के हालातों से लग रहा है कि काम नहीं हुआ। यह गंभीर लापरवाही बरती गई है। भविष्य में वैज्ञानिकों की बातों को सरकारों को कतई नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। - प्रो. अरुणालोके चक्रवर्ती, हेड मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़
विज्ञान व तकनीकी को गंभीरता से लेने की जरूरत
वर्ष 2007 में हांगकांग के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी थी कि कोविड 2 वायरस का जन्म होगा तो वह कई गुना ताकतवर बनकर आएगा। पूरी दुनिया के प्रमुख लोगों ने इसे देखा लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया। यही कारण है कि आज पूरी दुनिया महामारी से घिरी हुई है। पूरा विश्व एक साथ कभी लॉकडाउन नहीं हुआ। पॉलिसी मेकर, सरकारों को वैज्ञानिकों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए था। साथ ही विज्ञान को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
- प्रो. भूपिंदर सिंह भूप, यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
ग्रास रूट पर हुए रिसर्च को समझना होगा
वैज्ञानिक रिसर्च केवल इसलिए नहीं करते कि उन्हें प्रमोशन चाहिए, वह आगामी खतरों व संभावनाओं के बारे में पॉलिसी मेकर्स को बताते हैं। 13 साल पहले प्रकाशित हुए जर्नल आलेख को गंभीरता से लेने की जरूरत थी लेकिन वह नहीं हुई। आज हालात सबके सामने हैं। ग्रास रूट पर हुए रिसर्च को सरकारों व पॉलिसी मेकर्स को गंभीरता से लेने की जरूरत है। - पद्मश्री प्रो. आरसी सोबती, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पंजाब विश्वविद्यालय के पूर्व वीसी
जब चेताया था तो कहां सो रहे थे नीति निर्माता
वर्ष 2002-03 में सार्स वायरस आया था। आज उसी वायरस में कई अन्य वायरस मिले और वह ताकतवर बनकर पूरी दुनिया के सामने आ गया। इस खतरे के प्रति वैज्ञानिकों ने वर्ष 2007 में चेताया लेकिन इसको दरकिनार किया गया। सरकारों ने ध्यान नहीं दिया। आज स्थिति सभी के सामने है। जरूरत इस बात की है कि विज्ञान व तकनीक को गंभीरता से लेना होगा। - प्रो. प्रिंस शर्मा, डीन साइंसेज, पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़