कराची निवासी रुमेज अली खान दिल्ली में अपनी पत्नी से मिलने आए थे। उनकी पत्नी भारतीय मूल की है। उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। वह भारत 10 दिन के लिए आए थे लेकिन लॉकडाउन के कारण चार महीने तक ससुराल में ही रहे। पाकिस्तान के हैदराबाद निवासी मोहम्मद अली ने बताया कि 27 फरवरी को परिवार समेत सिकंदराबाद में रहने वाली अपनी साली से मिलने आए थे। लॉकडाउन के दौरान वीजा की अवधि समाप्त हो गई।
सिकंदराबाद पुलिस कमिश्नर ने उनके परिवार के साथ पूरा सहयोग दिया। भारत सरकार ने उनके वीजा की अवधि बढ़ा दी। लगभग साढ़े तीन माह बाद वतन लौटने की खुशी तो है लेकिन गम भी है कि वह हैदराबाद का चारमीनार और अन्य एतिहासिक इमारतों को देख नहीं सके। भारत में उन्हें कोई भी मुश्किल नहीं हुई। बेशक पाकिस्तान में उनके कारोबार को नुकसान पहुंचा है। सिकंदराबाद में उनका तीन बार कोरोना टेस्ट हुआ। पाकिस्तानी नागरिकों का कहना है कि दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास के साथ निरंतर संपर्क में रहे। लॉकडाउन लागू करना बढ़िया फैसला था।
दोनों देशों के नागरिकों को वतन भेजने के लिए नियुक्त प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण पाल सिंह ने बताया कि 25 से 27 जून तक 748 भारतीयों को आना था लेकिन किसी कारण वह नहीं आ सके। शुक्रवार को पाकिस्तान से आने वाले 114 भारतीयों में से 112 भारतीय उसी कोटे के हैं। सभी नागरिकों को कोरोना टेस्ट के बाद गृह राज्य भेज दिया जायेगा। जहां वह क्वारंटीन होंगे। पंजाब के 10 लोग अमृतसर में क्वारंटीन किए जाएंगे।
अमृतसर जेल में बंद पाकिस्तानी नागरिक का शव रेंजर को सौंपा
अमृतसर केंद्रीय जेल में बंद एक पाकिस्तानी नागरिक अब्दुल करीम की मौत हो गई थी। उसके शव को पाकिस्तान भेजा गया है। अमृतसर केंद्रीय जेल के सुपरिंटेंडेंट की मौजूदगी में पाकिस्तानी नागरिक का शव रेंजर को सौंपा गया। यह पाकिस्तानी चार वर्ष से जेल में सजा काट रहा था। इस पर वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में रहने का आरोप था। इसकी मौत दो दिन पहले जेल में हुई थी।