मुख्यमंत्री ने उच्च शिक्षा मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा को भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार में अपने समकक्ष को पत्र लिखने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न संस्थाओं के वाइस चांसलर से अपील की है कि वे कोविड संकट के मद्देनजर परीक्षाएं करवाने संबंधी जोखिम का उल्लेख करते हुए परीक्षाएं रद्द करने को यूजीसी को पत्र लिखें।
शिक्षा सचिव ने यूजीसी को लिखा पत्र
शिक्षा सचिव राहुल भंडारी ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने पहले ही यूजीसी के चेयरमैन को 6 जुलाई को आखिरी सेमेस्टर की परीक्षाएं करवाने संबंधी जारी यूजीसी के दिशानिर्देशों पर फिर विचार करने को पत्र लिखा था। उन्होंने लिखा, ‘कोविड-19 संकट और रोजाना बढ़ रही मरीजों की संख्या को ध्यान में रखते हुए परीक्षा करना दूर-दूर तक संभव नहीं लगता। ज्यादातर यूनिवर्सिटियों/कॉलेजों के हॉस्टल खाली करवा लिए गए थे और कोविड केयर सेंटरों के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अब तक नियमित रेल/बस सेवाएं चालू नहीं की गई थी, जिससे विद्यार्थियों का परीक्षा देने आना संभव नहीं लगता।
परीक्षाओं को लेकर कैप्टन के रुख का अनएडेड कॉलेजों ने किया स्वागत
पंजाब में विद्यार्थियों की परीक्षाओं न करवाने के फैसले पर अडिग मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के फैसले का अनएडेड कॉलेजों ने स्वागत किया है। जाने-माने शिक्षाविद सतनाम सिंह संधू, मंजीत सिंह, अशोक मित्तल, अंशु कटारिया ने कैप्टन द्वारा यूजीसी को पंजाब में परीक्षा नहीं कराने की दोबारा की गई अपील का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि कैप्टन का यह कदम पंजाब के विद्यार्थियों के लिए तो लाभदायक है ही, लाखों दूसरे सूबों के विद्यार्थी जो पंजाब में विभिन्न कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के छात्र हैं, को भी इससे राहत मिलेगी।
इसके साथ ही चरणजीत सिंह वालिया अध्यक्ष नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन, डॉ. गुरमीत सिंह धालीवाल अध्यक्ष पुतिया, एस. जगजीत सिंह अध्यक्ष बीएड फेडरेशन, एस. राजिंदर धनोआ पॉलिटेक्निक एसोसिएशन, जैसनिक सिंह बीएड एसोसिएशन, एस. निर्मल सिंह ईटीटी फेडरेशन, शिमांशु गुप्ता आईटीआई एसोसिएशन, एस. सुखमंदर सिंह चट्ठा अध्यक्ष पंजाब अनएडेड डिग्री कॉलेज ने भी कैप्टन के रुख का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल 1600 कॉलेजों और दर्जनों विश्वविद्यालयों को बल्कि अन्य राज्यों के पंजाबी छात्र और छात्राओं को भी राहत मिली है क्योंकि कोरोना के कारण परीक्षा में उपस्थित होना बहुत कठिन था।