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Chandigarh: जीएमसीएच-32 के ENT विभाग का कमाल, 10 महीने में 10 बच्चों की सर्जरी कर बनाया सुनने-बोलने लायक

Thu, 20 Jul 2023 01:33 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अगर बच्चा किसी आवाज की ओर ध्यान न दे या दो साल की उम्र तक एक भी शब्द नहीं बोल पाए तो डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर जल्द ही यह पता चल जाए कि बच्चे के सुनने की क्षमता में कमी है तो उसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए 2 से 3 साल तक की उम्र ही सही है।
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GMCH 32 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 के ईएनटी विभाग में 10 महीने में 10 बच्चों का कोक्लियर इंप्लांट किया गया है। इन बच्चों की सर्जरी पूरी तरह सफल रही है।
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जीएमसीएच-32 में पिछले पांच साल में बच्चों की 30 सर्जरी हुई, जबकि 10 महीने में 10 सर्जरी कर विशेषज्ञों ने ऐसे मरीजों की राह आसान बनाने की रफ्तार तेज कर दी है। ईएनटी विभाग के प्रमुख प्रो. रोशन कुमार वर्मा का कहना है कि पीजीआई में महीने में 15 से 20 सर्जरी की जाती है। इसे देखते जीएमसीएच 32 की टीम भी बेहतर प्रयास करने में जुटी है। सप्ताह में छह दिन 12 ओटी टेबल पर उनके तीन प्रोफेसर, छह सीनियर रेजिडेंट, नौ जूनियर रेजिडेंट ईएनटी से जुड़े मरीजों की सर्जरी कर रहे हैं।

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केस- 1
कुरुक्षेत्र निवासी तीन साल की आयशा आठ महीने पहले तक न सुन पाती थी न ही कुछ बोल पाती थी। उसके पिता सोनी कुमार ने उसे जीएमसीएच-32 के ईएनटी विभाग में दिखाया। डॉक्टर ने जांच के बाद बताया कि आयशा बिल्कुल ठीक हो जाएगी। उसकी कोक्लियर इंप्लांट सर्जरी करनी होगी। सोनी ने डॉक्टर के निर्देश पर आयशा की सर्जरी करवाई। आयशा पापा, मां, बाबा जैसे शब्द बोलने लगी है। महज 8 महीने में उसे सुनाई देने लगा है। वह ईएनटी विभाग की ओर से ऐसे बच्चों के लिए बनाए गए गॉसिप ग्रुप की सदस्य है।

केस- 2
कैथल निवासी राजकुमार अपने दो साल की बेटे वियान के न सुन पाने से बेहद दुखी थे। राजकुमार ने बताया कि वियान की बड़ी बहन को भी यही समस्या थी। उसका एक निजी अस्पताल में इलाज कराया, जिसमें काफी पैसे खर्च हो गए। अब जीएमसीएच 32 में वियान की सर्जरी कराई। अब वियान 100 प्रतिशत सुनने लगा है। राजकुमार का कहना है कि सरकारी दर पर बहुत आसानी से इलाज हो गया। वियान भी विभाग के गॉसिग ग्रुप में जुड़ा है।

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जन्मजात समस्या हो तो जरूर कराएं जांच 
प्रो. रोशन वर्मा ने बताया कि सुनने की क्षमता में कमी पैदायशी हो सकती है, इसलिए हर बच्चे की सुनने की क्षमता की जांच होनी चाहिए लेकिन अनजाने में लोग यह जांच नहीं करते। इसके लिए किसी ईएनटी विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए। जांच में मशीन की मदद से उसकी सुनने की क्षमता का पता चल जाता है।

अगर बच्चा किसी आवाज की ओर ध्यान न दे या दो साल की उम्र तक एक भी शब्द नहीं बोल पाए तो डॉक्टर से मिलना चाहिए। अगर जल्द ही यह पता चल जाए कि बच्चे के सुनने की क्षमता में कमी है तो उसका इलाज किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए 2 से 3 साल तक की उम्र ही सही है। इसके बाद इलाज कराने का कोई खास फायदा नहीं होता है क्योंकि पांच साल की उम्र तक बच्चे के सुनने, समझने और बोलने की क्षमता का पूरा विकास हो जाता है।

ऐसे बच्चों की मुश्किल यूं हो रही आसान
बच्चे में अगर 100 फीसदी बहरापन है और इसका पता 5 बरस की उम्र से पहले चल जाए (न्यू बॉर्न हियरिंग टेस्ट से) तो आर्टिफिशियल ईयर (कोक्लियर इंप्लांट) से इसका इलाज मुमकिन है। इस मशीन से जितनी जल्दी दिमाग की ट्रेनिंग शुरू हो जाए उतना बेहतर रिजल्ट आता है। बच्चों के इस तरह के बहरेपन के इलाज में या तो हियरिंग एड दिए जाते हैं या फिर बच्चे को कोक्लियर इंप्लांट कर दिया जाता है। इन तरीकों से बच्चे की सुनने की क्षमता ठीक हो जाती है। हालांकि, इसके लिए स्पीच थैरेपी देनी होती है। 
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ये हैं जरूरी...
  • पैदा होते ही बच्चे के कानों का टेस्ट कराएं। मशीन की मदद से उसकी ब्रेन की वेव्स को देखकर ही पता चल जाता है कि उसकी सुनने की क्षमता कैसी है।
  • 45 साल की उम्र के बाद कानों का नियमित चेकअप कराते रहें। अगर कान ठीक हैं तो साल में एक बार जांच करा सकते हैं।
  • शोरगुल वाली जगह, मसलन फैक्ट्री आदि में काम करते हैं तो कानों के लिए प्रोटेक्शन जरूर लें। आप इयर प्लग लगा सकते हैं।
  • म्यूजिक सुनते वक्त वॉल्यूम हमेशा मीडियम या लो लेवल पर रखें। तेज आवाज में सुनने से कानों को नुकसान हो सकता है।
  • शोरगुल वाली जगहों पर शोर को खत्म करने वाले (नॉइल कैंसलिंग) इयरफोन का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन आवाज कम ही रखें। यह उन लोगों के लिए फायदेमंद हैं जो लगातार ट्रेवल करते हैं।

जन्मजात बहरेपन के कारण
मां को टोक्सोप्लाज़मोसिज़, रूबेला, साइटोमेगालोवायरस, खसरा और दाद से जन्म के समय जन्मजात बहरापन पैदा कर सकते हैं।

क्या है कोक्लियर इंप्लांट
कोक्लियर इंप्लांट एक छोटी सी इलेक्ट्रानिक डिवाइस है। जिसके भीतरी और बाहरी दोनों भाग होते हैं। यह डिवाइस सुनने के लिए उत्तरदायी कोक्लेयर नर्व को आवाज समझने के लिए उत्तेजित करती है।
 
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