शिक्षा के अधिकार कानून के तहत पहली से आठवीं में लागू नो डिटेंशन पॉलिसी (कोई फेल नहीं होगा) के परिणाम स्कूलों में नौवीं के रिजल्ट में देखने को मिल रहे हैं। राजधानी में स्कूलों में बीते सप्ताह नौवीं कक्षा के एलिजिबल फोर इंप्रूवमेंट ऑफ परफॉर्मेंस (ईआईपीओ) के नतीजे जारी किए गए।
इन नतीजों में कई स्कूलों में काफी संख्या में बच्चों के रिजल्ट काफी खराब आए। वहीं 11वीं के नतीजे भी खराब आ रहे हैं। इसके बाद अब शिक्षा निदेशालय ने बच्चों व अभिभावकों की शिकायतों को 15 दिन के अंदर सुलझाने के निर्देश दिए हैं। अभिभावक कॉपी जांचने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
यदि वह फिर भी रिजल्ट से संतुष्ट नहीं होते तो उन्हें जिला उपशिक्षा निदेशक से अपील करनी होगी। एक अनुमान के मुताबिक, सरकारी स्कूलों के हजारों की संख्या में बच्चे नौवीं व 11वीं में फेल हुए हैं। इस तरह से बीते एक माह से 10वीं व 12वीं की पढ़ाई कर रहे यह बच्चे नतीजों के बाद फेल हो गए हैं।
वहीं नतीजों के बाद कुछ स्कूलों में छात्रों व अभिभावकों की ओर से हंगामे की घटनाएं सामने आ रही हैं। सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल का कहना है कि नौवीं में खराब रिजल्ट आने का कारण नो डिटेंशन पॉलिसी है। उन्होंने बताया कि पहली से आठवीं तक बच्चों को फेल न करने का नियम है। ऐसे में जब बच्चे नौवीं में आते हैं तो उनके लिए सब एक कदम से कठिन हो जाता है और पढ़ाई पर ध्यान भी नहीं देते हैं।
उल्लेखनीय है कि बीती 10 मई को यमुना विहार स्थित सरकारी स्कूल में नतीजे खराब आने के बाद अभिभावकों व बच्चों ने काफी हंगामा किया था। अब लगातार इस तरह के हंगामे देखने को मिल रहे हैं। अब शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को निर्देशित किया है कि वह नौवीं व 11वीं की कंपार्टमेंट की उत्तर पुस्तिकाओं की दुबारा जांच करें। इसके लिए अभिभावकों व बच्चों को आवेदन करना होगा।