आम छात्रों से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं की 44 मांगों को लेकर 16 दिन से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे एसएफआई कार्यकर्ताओं ने विवि प्रशासन के नोटिस के बावजूद अनशन समाप्त नहीं किया। एसएफआई ने हड़ताल को समाप्त करने के लिए विवि प्रशासन पर दबाव बनाए जाने को थमाए नोटिस के विरोध में शुक्रवार को ब्लैक डे मनाया।
अनशन पर बैठे तीन कार्यकर्ताओं के साथ सैकड़ों कार्यकर्ता सड़क किनारे पुस्तकालय के बाहर खुले में मुंह पर काली पट्टियां बांध कर सुबह से जुट गए। बारह बजे तक हड़ताल समाप्त करने के दिए गए समय के बावजूद कार्यकर्ता नहीं हटे। नोटिस और हड़ताल को समाप्त करवाने के किए जा रहे प्रयासों का विरोध किया और इसे सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या करार दिया।
इकाई पदाधिकारियों ने बाकायदा डीएसडब्लू को लिखित में नोटिस का जवाब भी सौंपा, जिसमें साफ लिखा है कि वे परिसर में किसी तरह का माहौल खराब नहीं कर रहे हैं। विवि प्रशासन के धमकाने से वे अनशन नहीं तोड़ेंगे। प्रशासन यदि ऐसा चाहता है तो वह लिखित में दे कि सौंपे गए मांगपत्र में शामिल 44 मांगों को कब तक पूरा किया जाएगा।
अनशन पर छात्राओं ने संभाला मोर्चा
शुक्रवार को छात्रा कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला। शुक्रवार को एसएफआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य ला छात्रा ज्योति ठाकुर, एमफिल इतिहास की छात्रा पल्लवी, और अर्थशास्त्र की छात्रा गीतांजलि नेगी बैठी।
पूरा दिन परिसर में डटी रही पुलिस
अनशन समाप्त करने को प्रशासन द्वारा दिए गए बारह बजे तक अल्टीमेटम के बाद सुबह से ही विवि परिसर में बालूगंज थाना और बाहर से जवान तैनात कर दिए गए थे। अनशन स्थल पुस्तकालय के बाहर जवान और विवि के सुरक्षा कर्मी बराबर नजर बनाए हुए थे।
करीब डेढ़ बजे पुलिस की क्यूआरटी विशेष दल की बस भी मौके पर पहुंच गई थी। उनके सामने ही छात्र मुंह पर काली पट्टियों को बांध कर बैठ अपनी मांग उठाने और जबरन आंदोलन को समाप्त करने का विरोध जताते रहे। कुलपति करीब एक बजे परिसर पहुंचे।
जनजातीय छात्र संघ ने किया हड़ताल का समर्थन
जनजातीय छात्र संघ की विवि इकाई ने एसएफआई द्वारा आम छात्रों की मांगों को मनवाने को शुरू की गई भूख हड़ताल का समर्थन किया है। 16 दिनों से चली आ रहे इस आंदोलन को संघ के अध्यक्ष अरुण राणा और पूर्व सचिव अनिल नेगी ने जायज ठहराते हुए कहा कि उनका संघ इसे अंत तक पूरा समर्थन देगा।