66 रैंकर दारोगाओं को साल 1999 की वरिष्ठता देने का मामला उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) के गले की फांस बन सकता है। इस फैसले के बाद यूपी में उसे लागू करने का दबाव बढ़ जाएगा। यूपी में करीब 1268 रैंकर दारोगा बताए जाते हैं।
दूसरी ओर, वरिष्ठता देने के खिलाफ लामबंद हुए दारोगाओं का कहना है कि मुख्यालय का फैसला न्यायोचित नहीं है। अपनी बात को साबित करने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी हवाला देते हैं, जिसमें कहा गया है कि वरिष्ठता पिछली तारीख से लागू नहीं की जा सकती है।
रैंकर दारोगाओं को वरिष्ठता देने का मामला उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लंबे समय से विचाराधीन है। न्यायालय में मामला विचाराधीन रहा है।
न्यायालय जाने की तैयारी
तीन दिन पहले अचानक उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने 66 रैंकर दारोगाओं को वरिष्ठता प्रदान कर दी, जिससे सीधी भर्ती के दारोगाओं में आक्रोश फैल गया। इन रैंकर दारोगाओं में से अधिकतर उनके अधीनस्थ रहे हैं।
यह फैसला उस समय हुआ है, जब दारोगाओं को इंस्पेक्टर पद पर पदोन्नति मिलने वाली है। अपने जूनियरों के सीनियर हो जाने से दारोगाओं में हलचल है। पुलिस मुख्यालय में प्रत्यावेदन कर विरोध जता चुके दारोगा अब न्यायालय जाने की तैयारी में हैं।