बोर्ड ने विद्यार्थियों को नेटवर्किंग और इंटरनेट में निपुण बनाने का निर्णय लिया है।
तकनीकी शिक्षा को लेकर युवाओं का रुझान घटता जा रहा है। इसका खुलासा विधानसभा सेशन के दौरान पूछे गए एक सवाल से हुआ। खुलासा हुआ है कि पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह स्टेट टेक्निकल यूनिवर्सिटी के अधीन 66 तकनीकी कॉलेज है। जिनमें कुल 23359 सीटें हैं, जिनमें से 17533 खाली पड़ी हैं।
वहीं आईके गुजराल तकनीकी यूनिवर्सिटी जालंधर के अधीन आने वाले 115 कॉलेजों की कुल 33000 सीटों में से 18495 खाली पड़ी हैं। इसके बावजूद सरकार नए कॉलेज शुरू करने की अनुमति दे रही है। कांग्रेस के अजीत इंदर सिंह मोफर ने यह मुद्दा उठाया था। जिसके जवाब में कैबिनेट मंत्री मदन मोहन मित्तल ने राज्य में कुल संस्थान, उनकी सीटों और खाली पड़ी सीटों के बारे में जानकारी दी।
मित्तल ने बताया कि राज्य में कुल 192 पॉलीटेक्निक हैं। उनमें भी 30514 सीटें खाली पड़ी हैं। मोफर ने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी संख्या में सीटें खाली पड़ी हैं, फिर नए कॉलेज खोलने की क्या जरूरत है। मित्तल ने कहा कि इलाके की जरूरत देखने के बाद ही कॉलेज खोलने की इजाजत दी जाती है। अब निजी कॉलेजों के दाखिले भी ऑनलाइन की जाएगी।
मोफर ने कहा कि सदन कमेटी बना कर जांच कराई जाए कि कॉलेजों में स्टूडेंट्स लाने को सरकार क्या कर रही है। मित्तल ने कहा कि डिमांड न होने की वजह से बच्चे नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा की ओर बच्चों का रुझान घट रहा है, यह ट्रेंड है। पहले दूसरे राज्यों से बच्चे यहां आते थे, अब वहां भी कॉलेज खुल गए हैं। राणा गुरजीत ने कहा कि रेगुलेशन न होने के कारण निजी कॉलेजों में शिक्षा का स्तर गिरा है।
मनोरंजन कालिया ने कहा कि सरकार को कोई ऐसा मैकेनिज्म बनाना चाहिए कि यह पता लग सके कि किस क्षेत्र में डिमांड बढ़ रही है। गुरकीरत सिंह कोटली ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में कुछ समय पहले कागज की खरीद के दौरान घोटाले का मुद्दा उठाया, लेकिन शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने विभाग का बचाव करते हुआ कि खरीद में उच्चस्तरीय तकनीकी कमेटी बनती है।