प्रदर्शन करते पीयू के प्रोफेसर
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यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन(यूजीसी) द्वारा नए एपीआई स्कोर को लेकर जारी किए गए नए नोटिफि केशन के खिलाफ कालेज और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर विरोध में आ गए हैं। कालेज शिक्षकों का आरोप है कि एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी ने एपीआई सिस्टम को सरल बनाने का आश्वसन दिया था, लेकिन यूजीसी ने उल्टे इसे ओर कठिन बना दिया है। अब कालेज शिक्षकों के लिए प्रमोशन पाना और भी कठिन हो गया है। असिस्टेंट प्रोफेसर स्तर पर एंट्री भी अब अधिक मुश्किल हो जाएगी।
वीरवार पीयू में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन सेंटर के बाहर 100 से अधिक कालेज और यूनिवर्सिटी प्रोफेसरों ने यूजीसी के नए नियमों का विरोध किया। करीब तीन घंटे तक शिक्षक विरोध में सेंटर के बाहर बैठे रहे। शिक्षकों ने उत्तर पुस्तिकाओं को चेक करने से भी इंकार कर दिया। शुक्रवार को भी विरोध जारी रहेगा। शिक्षकों को मनाने के लिए पीयू रजिस्ट्रार और कुलपति भी पहुंचे। लेकिन शिक्षकों ने उनकी बातें नहीं मानीं। शुक्रवार को भी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का विरोध जारी रहेगा।
डॉ.अजय के अनुसार नए नोटिफि केशन के मुताबिक प्रमोशन के लिए यूजीसी से मान्यता प्राप्त जर्नल में छपे रिसर्च पेपर को ही मान्य माना जाएगा। विरोध का दूसरा कारण यूजीसी द्वारा कालेज शिक्षकों का वर्कलोड बढ़ा दिया गया है। जिससे उन्हें रिसर्च कार्य के लिए समय नहीं मिल पाएगा। उन्होंने कहा कि कई अन्य नए प्रस्ताव भी शिक्षकों के हक में नहीं हैं। उधर, शिक्षकों के विरोध के कारण परीक्षाओं के रिजल्ट घोषित होने में देरी हो सकती है।
रजिस्ट्रार से हुई शिक्षकों की बहस
उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का विरोध कर रहे शिक्षकों को मनाने के लिए पहले पीयू रजिस्ट्रार कर्नल जीएस चड्ढा पहुंचे। लेकिन रजिस्ट्रार और शिक्षकों में कहासुनी बढ़ गई। मामले को सुलझाने कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि विरोध में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन बंद करना सही कदम नहीं है। प्रो.ग्रोवर ने कहा कि ऐसी घटनाओं से यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा को धक्का लगता है। लेकिन शिक्षकों ने दो दिन विरोध जारी रखने का फैसला लिया है।