निजी स्कूलों में चल रही व्यवसायिक गतिविधियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। एक तरफ भारी भरकम फीस और दूसरी तरफ वर्दी से लेकर किताबें स्कूल के अंदर से खरीदने का दबाव अभिभावकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
स्कूलों की इस मनमानी के खिलाफ अभिभावकों ने मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री और जिला शिक्षा अधिकारी को सात निजी स्कूलों की शिकायत भेजी है।
अभिभावकों ने 28 फरवरी को सात स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग को शिकायते भेजी थी। लेकिन नौ दिन बीत जाने के बाद विभाग की ओर से अभिभावकों को कोइ जवाब नही मिला है।
शिक्षा विभाग ने 19 फरवरी को शहर के सभी हरियाणा बो्ड व सीबीएसई से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को नोटिस भेज कर शिक्षा नियमावली 2003 का हवाला देते हुए स्कूल में चल रही व्यवसायिक गतिविधियों पर रोक लगाने को कहा था।
शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से स्कूलों की शिकायत भी मांगी थी ताकि मनमानी करने वाले स्कूलों पर शिकंजा कसा जा सके। विभाग ने स्कूलों की एनओसी रद्द करने की बात कही थी लेकिन अभिभावकों की शिकायत पर शिक्षा विभाग भी मौन साधे हुए है।
स्कूलों की मनमानी के विरोध में ओपी फाउंडेशन के संस्थापक मनोज दीक्षित ने इस मामले को मुख्यमंत्री के सामने भी उठाया है। दीक्षित ने बताया कि स्कूल प्रंबधक ने अभिभावकों को नोटिस जारी किए हैं, जिसमें 15 मार्च को रिजल्ट घोषित होने के बाद नई कक्षा में वर्दी, किताबे आदि स्कूलों से लेना अनिवार्य किया गया है।
मोटी आमदनी के लिए स्कूलों के नाम से किताबें और वर्दी बनवाई जाती है। ऐसे में अभिभावकों को या तो स्कूलों के अंदर बनी दुकानों से या फिर स्कूलों के द्वारा सुनिश्चित दुकानों से वर्दी और किताबें लेनी पड़ती हैं।
मेरे पास फिलहाल शिकायत नहीं पहुंची है। अगर स्कूलों के अंदर व्यवसायिक गतिविधियां चलने की शिकायत मिलती है तो कार्रवाई निश्चित तौर पर की जाएगी। -सतेंद्र कौर वर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी